नयी दिल्ली, विपक्ष ने बजट को नोटबंदी से जोड़कर सरकार पर आज तीखा हमला किया और कहा कि नोटबंदी अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती और जनता के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक साबित हुई जिससे पूरा बजट दिशाहीन हो गया है और उसमें जन आकांक्षायें पीछे छूट गयीं।

वर्ष 2017-18 के बजट पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के वीरप्पा माेइली ने कहा कि नोटबंदी ने देश और लोगों को फायदे की बजाए नुकसान पहुंचाया। इससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार मंदी पड़ गई। छोटे कारोबारी,किसान और मजदूर बेहाल हो गए। विकास दर थम गई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर चुटकी लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को यह महान आइडिया संभवत पाकिस्तान से मिला जहां नोटबंदी के लिए भ्रष्टाचार,आतंकवाद और कालेधन पर प्रहार के यही सारे तर्क दिए जा रहे थे। लगता है ‘अब हम पाकिस्तान का अनुसरण करने पर आ गए हैं।’

श्री मोइली ने कहा कि एक समय था जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बैंको का राष्ट्रीयकरण कर उन्हें गरीबों की पहुंच में ला दिया था एक समय अब है जब श्री मोदी ने नोटबंदी कर बैंको को गरीबों से दूर कर दिया। वे आज अपना जमा पैसा ही खातों से नहीं निकाल पा रहे हैं। सरकार इससे बेपरवाह है उसकी नजर में तो जो नोटबंदी का समथर्न करे वह ईमानदार आैर जो विरोध करे वह देशद्रोही आैर कालेधन वाला है।

उन्होंने बजट को लेकर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह एक दिशाहीन और उद्देश्यविहीनी बजट है। नोटबंदी जैसे बड़े अभियान के बाद उम्मीद की जा रही थी कि इस बजट में नोटबंदी के आघात को संभालने ,अर्थव्यवस्था को दुरुस्त बनाने ,मंहगाई दूर करने,रोजगार बढ़ाने आैर विकास जैसे बुनियादी मुद्दोें के लिए रास्ते निकालने के ठोस उपाय होंगे पर इसमें सब नदारद है। यह एक राजनीतिक जुमला बनकर रह गया है। सबसे बड़ी त्रासदी तो यह है कि सरकार के इस बजट ,आर्थिक सर्वेक्षण और प्रधानमंत्री के संसद के भीतर और बाहर दिए गए भाषणों में कोई सामंजस्य नहीं दिखाई देता।

श्री मोइली ने कहा कि कुल मिलाकर बजट में कुछ भी ऐसा नहीं है जो जनता की उम्मीदों, आकांक्षाओं पर खरा उतर सके, अर्थव्यवस्था को गति दे सके और बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के हितों की रक्षा कर सके। उन्होंने कहा कि अमेरिका में नये राष्ट्रपति संरक्षणवाद की जो नीति अपना रहे है उससे भारतीय आईटी उद्योग को बचाने के लिए बजट में कुछ नहीं है।

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