केंद्रीय सरकार वर्ष 2015-16 का वार्षिक बजट संसद में पास हो गया. भारत सरकार के वित्तमंत्री श्री अरुण जेटली एक तरफ यह रस्मी वादा दोहराया कि भष्टïाचार को खत्म किया जायेगा और दूसरी ओर रिजर्व बैंक को भी कहा कि जब देश के बैंक ब्याज दरें घटायेंगे तथा देश की विकास दर (जीडीपी) बढ़ सकती है. वैश्विक हालत भारत के अनुकूल है. लेकिन रिजर्व बैंक की ब्याज दरें न घटाने की मौद्रिक नीति और सार्वजनिक व निजी बैंकों द्वारा ब्याज दरें न घटाने से देश की अर्थव्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों में वह गति नहीं आ पा रही है जो अपेक्षित है. वित्तमंत्री ने भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को उचित कदम और किसान हितैषी बताया. लेकिन उस पर राजनैतिक विरोध प्रदर्शन का भी दौर चल रहा है. कहीं यह भूमि विवाद हमारे निवेशक औद्योगिक स्थापना के वातावरण को उसी तरह न बिगाड़ दे जैसे पश्चिम बंगाल के सिंदूर क्षेत्र में ममता बनर्जी ने माक्र्सवादी सरकार के चिर विरोध में टाटा को वहां अपना निवेश व नेनो कार प्रोजेक्ट ही उठा लेने को बाध्य कर राज्य के विकास का विनाश कर लिया. हमने संसदीय प्रजातंत्र की जो नीति अपनायी उसमें तो सही निहित है कि बहुमत सत्ता शासन चलायेगा और विपक्ष संसदीय सीमा में आलोचना या समालोचना करेगा. जब कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार थी तो उन्होंने शासन-संसद ही चलने दिया अब कांग्रेस व अन्य पार्टियां शासन और संसद नहीं चलने दे रहे हैं. सवाल यह है कि देश क्या चलेगा और कैसे चलेगा.

वित्तीय क्षेत्र की मौद्रिक व आर्थिक क्षेत्र के संदर्भ में वैश्विक हालत भारत के अनुकूल बताते हुए श्री जेटली यह बता रहे हैं कि एक बड़ी अर्थव्यवस्था का राष्टï्र ब्राजील चुनौतियों से जूझ रहा है, यूरोप के आर्थिक जगत में सुस्ती है- ग्रीस (यूनान) का आर्थिक दिवालियापन और यूक्रेन का गहराता राजनैतिक संकट भी आर्थिक कठिनाईयां पैदा कर चुका है. चीन विकास दर सिमट कर 7 प्रतिशत के इर्दगिर्द आ चुकी है.

देश के आर्थिक सुधारों में कहा गया है कि कारपोरेट टैक्स दर 30 से घटा कर 25 प्रतिशत करने का विचार है. बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी कम करके 52 प्रतिशत पर लायी जायेगी. संपत्ति कर तो हटाया गया है लेकिन उसके स्थान अमीरों पर दो प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज लगाकर सरकार की आज से 9000 करोड़ रुपये बढ़ाये गये हैं. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से रोजगार के अवसर और संरचना का विकास होगा. पेट्रोल के दाम अब तक 11 बार घटाये जा चुके हैं लेकिन क्रूड के भाव गिरने का पूरा लाभ अभी उपभोक्ताओं को इसलिये नहीं दिया जा सकता क्योंकि पिछले दिनों क्रूड के रिकार्ड ऊंचे भावों के कारण उन्हें बहुत झटका लगा और इस समय भी भारत की तेल आयात कम्पनियों को 30 हजार करोड़ रुपये का इन्वेन्ट्री लाभ हो रहा है.

पिछले 9 महीनों में डीजल की कीमतों में 10 रुपये प्रतिलीटर की कमी हो चुकी है. इसके बावजूद अभी तक देश में माल-भाड़ा की दरों में कमी नहीं की गयी है. यदि इन्हें इसी अनुपात में घटाया जाता रहा तो देश महंगाई में रफ्तार के साथ कमी भी आ जायेगी. सरकारों ने इस ओर कोई भी प्रयास नहीं किये हैं.

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