नई दिल्ली,  लगातार दूसरे साल सूखे ने पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। देश का करीब 25 फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में है। जाहिर है इससे कृषि उत्पादन पर भी खासा असर पड़ा है। लेकिन अच्छे मॉनसून की संभावना ने राहत दी है। लेकिन क्या एक अच्छे मॉनसून से ही बदल जाएंगे कृषि क्षेत्र के हालात। क्या मॉनसून से फिर गावों के चेहरे खिलेंगे। मॉनसून से कृषि उत्पादन पर कितना असर पड़ेगा और अगर मॉनसून देरी से आया तो क्या हालात होंगे।

दरअसल प्राइवेट एजेंसी स्काईमेट के बाद मौसम विभाग ने भी अच्छे मॉनसून का अनुमान जताया है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक इस साल सामान्य से ज्यादा बारिश का अनुमान है। भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि इस साल मॉनसून 106 फीसदी रहने का अनुमान है। इस साल मॉनसून वक्त पर आएगा और सामान्य या सामान्य से ज्यादा बारिश की 94 फीसदी संभावना है।
इस साल उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में सूखे की स्थिति है।

वहीं हरियाणा और बिहार में सूखे के हालात हैं लेकिन अभी यहां सूखे का एलान नहीं हुआ है। देश की 25 फीसदी आबादी सूखे से प्रभावित है और करीब 33 करोड़ लोग सूखे से पीडि़त हैं। 10 राज्यों के 256 जिलों में सूखा है। बता दें कि सूखा घोषित करने का जिम्मा राज्यों का होता है, लेकिन हरियाणा और बिहार ने सूखा घोषित नहीं किया है। केंद्र सरकार ने सूखे से निपटने के लिए मनरेगा के 19555 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2012-13 में 823.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी और इस साल कृषि ग्रोथ 1.4 फीसदी रही थी। 2013-14 में 936.7 मिलीमीटर बारिश हुई थी और इस साल कृषि ग्रोथ 4.7 फीसदी रही थी। 2014-15 में 781.7 मिलीमीटर बारिश हुई थी और इस साल कृषि ग्रोथ -0.2 फीसदी रही थी। 2015-16 में 765 मिलीमीटर बारिश हुई थी और इस साल कृषि ग्रोथ 1.1 फीसदी रहने का अनुमान है।

2012-13 के खरीफ सीजन में अनाज की पैदावार 12.80 करोड़ टन रही थी, जबकि 2013-14 में अनाज की पैदावार 12.86 करोड़ टन थी। 2014-15 के खरीफ सीजन में अनाज की पैदावार 12.37 करोड़ टन रही थी, जबकि 2015-16 में अनाज की पैदावार 12.42 करोड़ टन थी। 2012-13 के खरीफ सीजन में तिलहन की पैदावार 2.07 करोड़ टन रही थी, जबकि 2013-14 में तिलहन की पैदावार 2.26 करोड़ टन थी। 2014-15 के खरीफ सीजन में तिलहन की पैदावार 1.91 करोड़ टन रही थी, जबकि 2015-16 में तिलहन की पैदावार 1.75 करोड़ टन थी।

2012-13 के खरीफ सीजन में गन्ने की पैदावार 34.12 करोड़ टन रही थी, जबकि 2013-14 में गन्ने की पैदावार 35.21 करोड़ टन थी। 2014-15 के खरीफ सीजन में गन्ने की पैदावार 36.23 करोड़ टन रही थी, जबकि 2015-16 में गन्ने की पैदावार 34.63 करोड़ टन थी। 2012-13 के खरीफ सीजन में कॉटन की पैदावार 3.42 करोड़ गांठ रही थी, जबकि 2013-14 में कॉटन की पैदावार 3.59 करोड़ गांठ थी। 2014-15 के खरीफ सीजन में कॉटन की पैदावार 3.48 करोड़ गांठ रही थी, जबकि 2015-16 में कॉटन की पैदावार 3.06 करोड़ गांठ थी।

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