इस समय जुलाई में जून की हुई बरसात से लगभग 20 दिन के अंतराल की पुन: बरसात से देश और उसकी कृषि को भारी राहत मिली है. खरीफ की बुआई के बाद आयी फसलों व अंकुरणों के सूखने की नौबत आ गयी थी. सरकार ने भी वैकल्पिक योजनाएं बनाना शुरू कर दिया है. ऐसे समय में जुलाई में वर्षा के आ जाने से फसलों को जीवनदान मिल गया है. भारी बारिश हो रही है और अभी आगे कुछ दिनों तक भारी बरसात के होते रहने का भी अनुमान हो गया है. लगभग पूरे देश में वर्षा हो रही है.

मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी मध्यप्रदेश में 19 से 21 जुलाई तक और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 20 से 22 जुलाई तक भारी वर्षा होगी. इस समय तेज वर्षा के साथ हल्की वर्षा होते रहने का क्रम मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में जारी है. मौसम विज्ञानी डाक्टर आर.पी. शर्मा के अनुसार यह पानी फसलों में जड़ों तक बैठ रहा है और भूजल भी बन रहा है. इससे फसलें बढऩे व स्वस्थ्य होने लगती है और पैदावार खूब आती है. अब तक हुई बारिश सामान्य से 6 प्रतिशत कम है. जुलाई-अगस्त में मानसून की वर्षा रफ्तार में होने की उम्मीद है. उम्मीद है कि देश में 92 प्रतिशत वर्षा हो जाएगी. आठ से दस प्रतिशत का अंतर त्रासदायी नहीं होता है और औसत के हिसाब से इतना होता ही रहता है. देश में पिछले 3 सालों से 10 प्रतिशत कम का टोटा बना हुआ है. कुल मिलाकर इस साल जुलाई के पहले दो हफ्तों में मानसून सामान्य से 31 प्रतिशत कम रहा इससे सरकारों व कृषि क्षेत्रों को भारी चिन्ता हो गयी थी. इस समय तक झारखंड, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में सामान्य से ज्यादा वर्षा दर्ज की गयी है. उत्तर पूर्वी और पश्चिमोत्तर भारत में सामान्य से अधिक वर्षा होगी. ऐसा बंगाल की खाड़ी में दबाव का क्षेत्र बनने से हो रहा है.

मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पंजाब, हिमाचल, दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड में 67 प्रतिशत सामान्य रूप से वर्षा हुई है और गुजरात, सौराष्ट्र, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, कर्नाटक के तटीय इलाके, रायल सीमा और केरल में अभी वर्षा 21 प्रतिशत कम है. गुजरात व महाराष्ट्र में वर्षा कम होने की स्थिति में कृषि की वैकल्पिक योजना तैयार कर ली गयी है. नेपाल में भारी वर्षा के कारण उत्तरी बिहार में तो बाढ़ का खतरा हो रहा है और वहीं वर्षा की कमी से दक्षिणी बिहार में सूखे के हालात पैदा हो गये हैं. बिहार में सभी नदियां उफान पर हैं और पानी बढ़ता ही जा रहा है. यही हाल उत्तराखंड व उत्तरप्रदेश का है जहां सभी नदियां बाढ़ में आ गयी हैं.

राजधानी भोपाल में 15 घंटों में 5 इंच पानी बरसा. प्रदेश में सबसे ज्यादा वर्षा शाजापुर में 6 इंच वर्षा हो गयी. उज्जैन नगर हाल बेहाल हो गया. शहर में जल निकासी अवरुद्ध होने से घरों में पानी भर गया है. राजगढ़ जिले का सारंगपुर ने तालाब का रूप ले लिया. मध्यप्रदेश में सभी नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है. मौसम विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में सिस्टम तैयार है.
राजस्थान और पंजाब के ऊपर हवा का चक्रवात और उत्तरी मध्यप्रदेश पर भी ऊपरी हवा का सिस्टम बना हुआ है. इनके प्रभाव से मध्यप्रदेश भर में लगातार रिमझिम के साथ-साथ बीच-बीच में भारी वर्षा होते रहने के आसार हैं.