कांग्रेस नेतृत्व की यू.पी.ए. सरकार या भाजपा नेतृत्व की एन.डी.ए. सरकार- चाहे वे सत्ता में हो या विपक्ष में रही हैं इन्होंने राष्ट्र की इस वेदना को कभी नहीं समझा कि पूरा राष्ट्र ही हमेशा से यह मांग करता रहा है कि बलात्कारियों को फांसी की सजा का प्रावधान हो.

निर्भया कांड का सबसे जघन्य नाबालिग उम्र का अपराधी इसलिए न सिर्फ फांसी से बच गया बल्कि तीन साल की मामूली सी सजा के बाद जेल से भी छूट गया क्योंकि संसद में वह विधेयक पारित नहीं हो पाया. क्योंकि उस समय विपक्ष में बैठी भारतीय जनता पार्टी अन्य मसले पर संसद को ठप्प करती रही. मोदी सरकार चार साल से सत्ता में है.

बलात्कार के ऐसे अपराध लगातार होते जा रहे हैं लेकिन संवेदनहीन बने रहे. अब एक अध्यादेश लाकर फांसी की व्यवस्था की गयी है. इसके पीछे भी सरकार की भावना जनभावना को समझना नहीं है बल्कि कठुआ में हुआ बच्ची से बलात्कार कांड है. क्योंकि काश्मीर एक अर्से से राजनैतिक कारणों से सरकार की अलग प्रकार की बाध्यता बना हुआ है.

लेकिन जो आर्डिनेन्स आ रहा है उसमें भी यह अत्यन्त क्षोभ की बात है कि ‘रेप’ का आयु के आधार पर वर्गीकरण कर दिया गया. 12 साल की आयु तक बच्ची के साथ रेप होने पर फांसी की सजा, 13 से 16 साल की लडक़ी के साथ यह अपराध होने पर पूरी जिंदगी आखरी सांस तक जेल की सजा और महिला से बलात्कार पर 10 साल की जेल.

बच्ची के साथ बलात्कार निश्चित जघन्य अपराध है लेकिन लडक़ी या महिला के साथ भी इसका होना भी जघन्य अपराध है. क्या निर्भया, जो उस समय 23 साल की थी उसके साथ जो हुआ वह जघन्य अपराध नहीं माना जायेगा. क्या उसमें फांसी केवल इसलिए हुई है कि वह मर गयी थी.

जब निर्भया कांड का नाबालिक अपराधी छोड़ा जाने वाला था उसी रात महिला व अन्य संगठनों ने विशेष याचिका से रात सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई करा ली. लेकिन संसद कानून पास नहीं कर पायी थी और उसे छोडऩा पड़ा. इसके बाद जूवीनाइल एक्ट में जो संशोधन किये गये जो इतने बेमानी है कि उससे कुछ हासिल नहीं हुआ. वैसे अभी रेप में वर्गीकरण किया गया है. उसी तरह जूवीनाइल एक्ट में भी वर्गीकरण से सब बेकार कर दिया.

परिवर्तन यह किया गया कि रेप व हत्या के मामले में नाबालिक पर भी वयस्क की तरह वयस्क अदालत में ही केस चलेगा. लेकिन उसे वह सजा नहीं दी जायेगी जो इन अपराधों में वयस्क अपराधी को दी जाती है. उसे वयस्क मानकर बड़ी अदालत में सिर्फ मुकदमा चला देने से क्या होगा?

मोदी सरकार जूवीनाइल एक्ट की पुनर्समीक्षा कर हत्या व रेप के जघन्य नाबालिक अपराधी को सजा भी वयस्क अपराधी के समान हो.नाबालिक को सुधारना मां-बाप परिवार की जिम्मेदारी है. वह सरकार का काम नहीं माना जाना चाहिए. नाबालिक अपराधी को बालिक होने की उम्र तक जेल में रखा जाए और बालिक होने पर छोड़ा जाए और उसे उसके परिवार के लोग ही सुधारें.