गुजरात परिणाम से उत्साहित कांग्रेस नेताओं ने पूछा

नवभारत, न्यूज़,भोपाल,

गुजरात में कांग्रेस भले सत्ता से दूर है. लेकिन इसके बाद भी नेताओं में खुशी और उत्साह साफ झलक रहा है. यह कमोबेश कांग्रेस के प्रदर्शन को देखते हुए यह स्थिति मप्र में भी दिखाई दी. अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि कांग्रेस नेता अब यह कहने से परहेेज नहीं कर रहे हैं कि भाजपा को बहुमत मिला पर यह भी पूछिए कि उनके चेहरे की खुशी क्यों गायब है.

पूर्व मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजकुमार पटेल का कहना है कि गुजरात चुनाव ने यह बता दिया है कि एक बार फिर भाजपा ने सत्ता का दुरूपयोग करते हुए धन और बल का उपयोग करने में कसर नहीं छोड़ी है. लेकिन इसके बाद भी शहर की 53-54 सीटों को दरकिनार कर दें, तो परिणाम स्पष्ट कर देते हैं, कि भाजपा के खिलाफ ग्रामीण क्षेत्र में कितना असंतोष है.

भारत गांवों का देश कहा जाता है. ऐसे में ग्रामीण जनता ने तो दरकिनार की कर दिया है. पूर्व विधायक जोधाराम गुर्जर भी कमोबेश यही राय रखते हैं. उनका कहना है कि धर्म के नाम पर वोट लेने की भाजपा की पुरानी आदत है. यह कभी भी विकास के मूल्यों पर चुनाव नहीं जीते हैं.

इस बार भी इन्होंनें विकास के अलावा वह सभी मामले सामने लेकर आए हैं, जिससे सांप्रदायिक आधार पर जनता बंटी और वोटों का धु्रवीकरण हुआ.

इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर भी कांग्रेस के समर्थक जश्र मनाते हुए दिखे. व्हीसिल ब्लोअर डॉ आनंद राय की ट्विट इसमें अहम है. उनका कहना था कि किसानों ने अपना काम कर दिया, लेकिन व्यापारियों ने हमेशा की तरह इस बार भी व्यापार किया है. कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पीसी शर्मा की मानें तो प्रधानमंत्री ने संभाला लेकिन 150 लक्ष्य के बाद भी 100 के आसपास रह गए है.

जबकि कांगे्रस को लगभग 30 सीटों का फायदा हुआ है. इसके बाद कोई संशय नहीं रह गया है कि राहुल गांधी भारतीय राजनीति में स्थापित नेताओं में सुमार हेा गए हैं. इस लिहाज से कांग्रेस नेताओं में उत्साह है और हम इसका जश्र भी मनाएंगे.

जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष अवनीश भार्गव का कहना है कि प्रधानमंत्री की दर्जनों सभाओ के बाद भी कांग्रेस की बढ़त देश में कांग्रेस वापसी का संकेत है. हम अगले चुनाव में अपनी कमियों पर चिंतन कर मैदान में उतरेंगे.

कांग्रेस में इसलिए उत्साह

कांग्रेस के लिए इसलिए भी उत्साह है कि गुजरात में 182 सीटों में भाजपा की 106 सीटों के मुकाबले 73 से अधिक सीटों के आस-पास पहुंच गई है. जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 116 और कांग्रेस को 66 सीटें मिली थीं.

एग्जिट पोल भी 43 से ज्यादा सीटें नहीं दे रहे थे. ऐसे में सीटों के बढऩे से गुजरात के साथ ही मप्र में भी जश्र का माहौल बन गया है. ऐेसे में उसे उम्मीद है कि मप्र में वर्ष 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का न केवल माहौल बनेगा बल्कि वह सत्ता पर भी काबिज होगी.

मध्यप्रदेश के नेताओं ने मांगे थे वोट

गुजरात चुनाव के परिणाम भले ही कांग्रेस को सत्ता तक नहीं पहुंचा पाए हैं. लेकिन गुजरात में जीत के प्रयास करने में मप्र के नेताओं ने भी कसर नहीं छोड़ी है. यही वजह है कि चुनाव प्रचार के लिए सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल और विधायक सुंदरल लाल तिवारी, जीतू पटवारी और डॉ महेंद्र सिंह चौहान सहित कई नेता गुजरात में रहे और कांग्रेस के पक्ष वोट देने की अपील की.

अजय सिंह ने तो विधानसभा के शीतकालीन सत्र से छुट्टी मिलते ही गुजरात का रुख कर लिया था. यह बात अलग है कि वह अंतिम चरण में कांग्रेस के पक्ष में प्रचार में गए थे. लेकिन इससे पहले चुनावी प्रबंधन का जौहर मप्र में हुए चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव में दिखा चुके थे.

यदि इंदौर की राऊ विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक और गुजरात के प्रभारी सचिव जीतू पटवारी की बात करें, तो वह शुरूआती दौर से गुजरात में डेरा डाले हुए थे. राज्य के प्रभारी सचिव होने के नाते उनके ऊपर कई जिम्मेदारियां भी थींं.

 

यहां बता दें कि जीतू पटवारी मप्र युवक कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं और राहुल गांधी की टीम का हिस्सा माने जाते हैं. ठीक चुनाव के पहले उन्हें गुजरात का प्रभारी सचिव बनाए जाने से ही साफ हो गया था कि राहुल गांधी उन पर कितना भरोसा करते हैं. इतना ही नहीं कांग्रेस की तरफ से ज्योतिरादित्य सिंधिया बडोदरा और अहमदाबाद इलाके में चुनाव प्रचार की कमान संभाल चुके हैं. यह बात अलग है कि यहां कांग्रेस ज्यादा कमाल नहीं दिखा पाई. लेकिन इसके बाद भी उन्होंने बड़ोदा राजपरिवार से जुड़े इलाके में कांग्रेस की प्रचार की जिम्मेदारी बखूबी निभाई है.

 

 

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