मध्यप्रदेश जो अभी तक बाघ संरक्षण और विस्तारण में न सिर्फ भारत व दुनिया में सिरमौर रहा. आज वहां यह दुर्दशा हो गयी कि बाघों का बड़ी क्रूरता से बिजली का करंट लगाकर और गोली मारकर भी बड़े पैमाने पर शिकार किया जा रहा है. इस साल 2017 में जनवरी से अक्टूबर तक 18 बाघों की मौत हो चुकी है.

हर माह दो बाघों के मारे जाने का औसत कायम हो गया है. विंध्य क्षेत्र के उमरिया जिला स्थित अपना सफेद शेर दुनिया को देने की सानी रहने वाले बांधवगढ़ पार्क में बिजली का करंट लगाकर तीन शेरों को मार दिया गया.

मध्यप्रदेश में बाघों के संरक्षण पर पिछले 7 वर्षों में 1050 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं. जो शेर मारे गए हैं उनमें प्राकृतिक कारणों से बहुत कम और शिकार व करन्ट लगाकर ज्यादा मारे गये हैं.

राज्य ने केंद्र सरकार से मांग की है कि उसे 1200 करोड़ रुपयों की विशेष सहायता दी जाए जिससे बाघ क्षेत्रों में बिजली के तारों का इन्सूलेशन कर उनमें सीधा करन्ट लेकर बाघों को न मारा जा सके. जिस तरह मुख्यमंत्री श्री चौहान ने रेप पर फांसी की सजा का प्रावधान किया है उसी तरह बाघों के शिकार पर भी फांसी की सजा दी जाए.

 

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