मध्यप्रदेश जिसने देश में यह ख्याति प्राप्त की थी कि इस राज्यों में बाघों का संरक्षण सबसे ज्यादा और सबसे अच्छा हो रहा है. इनके संरक्षण में कान्हा किसली अभ्यारण राष्ट्र का प्रतीक बन गया था.

अब वहां यह अवनति आ गयी है कि यहां बाघों का सबसे ज्यादा संहार किया जा रहा है. इस साल 2018 के जनवरी माह में राज्य में 6 बाघ मार दिये गये हैं. शिकारी उन्हें जाल में फंसाकर, बिजली करंट लगाकर मार रहे हैं. उनके विभिन्न अंगों की तस्करी बढ़ गयी है और ऐसे अपराधी पकड़े भी जा चुके हैं.

जहां बाघ कोई शिकार करता है उसके बचे हुए भाग को वह खाने दुबारा भी आता है. अब अपराधी उस पर जहर डाल देते हैं और बाघ इस तरह भी मारा गया है. सरकारी अमला अपनी असफलता छिपाने के लिये इन्हें स्वाभाविक मौत भी बता देते हैं.

सन् 2016 से अभी तक 61 बाघ मारे जा चुके हैं. इनमें से कुछ ही स्वाभाविक रूप से मरे हैं. इससे पहले एक वर्ष में 30 बाघ मारे गए थे. शहडोल अंचल में बाघों का शिकार बढ़ गया है.

सन् 2014 में मध्यप्रदेश में 308 बाघ गणना में आये थे और इनकी संख्या और बढ़ाने की योजना तैयार की गई थी. लेकिन 2016 तक 30 बाघ मर चुके हैं. सन् 2017 में यह आंकड़ा पूरे देश में सबसे ज्यादा रहा.किसान भी उनके खेतों की बाड़ पर तारों में बिजली करन्ट लगा देते हैं.

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