इंदौर-उज्जैन-जबलपुर संभागों में सक्रिय मानसून, बांध लबालब, नदियां उफान पर

Heavy rainingइंदौर/भोपाल, 4 जुलाई. मध्यप्रदेश के इंदौर और उज्जैन संभाग में मानसून के प्रबल तथा जबलपुर संभाग में सक्रिय रहने से अनेक स्थानों पर मूसलाधार बारिश हो रही है।

इससे इंदौर, महू एवं उज्जैन जिलों में कई स्थानों पर सामान्य जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। इंदौर और देवास में तीन-तीन लोगों के वर्षाजनित हादसों में मृत्यु होने की खबर है। इसे मिला कर इस मौसम में प्रदेश में अब तक 18 लोगों को बारिश ने अपना शिकार बनाया है। आगामी चौबीस घंटों में भी इन क्षेत्रों में भारी से भारी बारिश होने का अनुमान है।

मौसम विभाग के अनुसार पिछले चौबीस घंटों में सर्वाधिक 360 मिमीमीटर वर्षा इंदौर जिले के महू में रिकार्ड की गई है। इसके साथ ही इंदौर में भी 213 मिमी वर्षा हुई है जिससे इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास आदि कई जिलों में नदी नालों में उफान आ गया है। इंदौर में भारी बारिश को देखते हुये जिला प्रशासन ने आज स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया।

इसके साथ ही खंडवा में 255 मिमी, बडवाह में 240 मिमी, खातेगांव में 226 मिमी, कन्नौद में 216 मिमी, इंदौर में 213.6 मिमी, हरसूद में 140 मिमी, धार में 126 मिमी, देवास में 124 मिमी, गंधवानी, खकनार एवं देपालपुर में 110 मिमी , जावरा, बडनगर एवं गौतमपुरा में 100 मिमी, तराना, सरदा, पंधाना सैलाना, एवं कुक्षी में 90 मिमी., रतलाम में 82 मिमी, महिदपुर में 80 मिमी उज्जैन में 71 मिमी तथा नसरुल्लागंज एवं सौसर में 70 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।

खंडवा जिले का ओंकारेश्वर बांध भर गया है और 23 में से नौ गेटखोकलर पानी नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है। बुरहानुपर में भी ताप्ती नदी का जलस्तर आज दोपहर 219.200 मीटर तक पहुंच गया है, जो खतरे के निशान से करीब एक मीटर नीचे है। ओंकारेश्वर एवं महेश्वर में नर्मदा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है तथा प्रदेश के कई बांधपानी से लबालब भर गये हैं। म.प्र.के 50 जिलों में से 48 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा हो चुकी है।

राजधानी भोपाल में हालांकि इस दौरान ज्यादा बारिश नहीं हुईलेकिन यहां की प्रसिद्ध भोजपाल झील में पानी की आवक बनी हुई है तथा इसका जलस्तर 1664.20 फीट तक पहुंच गया है जो पूर्ण भराव क्षमता 1666.80 फीट से मात्र ढाई फुट कम है। विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश में इंदौर उज्जैन भोपालएवं होशंगाबाद संभागों के जिलों में कहीं कहीं भारी से अतिभारी वर्षा होने की चेतावनी दी है।

उत्तराखंड में भारी बारिश का खतरा, तीन सौ लोग अभी भी हैं फंसे

देहरादून, 4 जुलाई. उत्तराखंड में आपदा से प्रभावित लोगों को राहत सहायता मुहैया कराने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास जारी हैं। वहीं, राज्य में फिर से भीषण बारिश का खतरा मंडरा रहा है। पांच और छह जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

राहत व बचाव की चुनौतियों के बीच एक रिपोर्ट के अनुसार, धर्मा और व्यास वैली क्षेत्रों में अभी भी करीब तीन सौ लोग फंसे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, चमोली और कुमाऊं क्षेत्र में भारी बारिश का अनुमान है। उधर, उत्तराखंड सरकार ने सभी तैयारियों का दावा किया है। राहत सामग्री लेकर जा रहे ट्रकों को खाली करने के लिए पांच नोडल बिंदू-गौचर, कर्णप्रयाग, जोशीमठ, गोपश्वर और ग्वालदम बनाए गए हैं जहां से इसे हेलीकाप्टर में लादकर प्रभावित इलाकों में पहुंचाया जा रहा है।

ऐसी आशंका है कि अगर फिर से बारिश हुई थी तो सड़के फिर से अवरूद्ध हो सकती हैं। उत्तराखंड के मुख्य सचिव सुभाष कुमार की ओर से जारी परामर्श में कहा गया है कि, मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि अगले 72 घंटे के दौरान चमोली के कई स्थानों और कुमांऊं क्षेत्र विशेष तौर पर पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और उधमसिंह नगर जिलों में भारी बारिश (70-90 मिलीमीटर) हो सकती है। परामर्श के अनुसार, उत्तराखंड के कुछ इलाकों में माध्यम बारिश (20-40 मिलीमीटर) का अनुमान है। जिला अधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सतर्क रहने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने को कहा जाता है ताकि आगे जानमाल का नुकसान नहीं हो। उत्तराखंड के कई स्थानों पर 20 से 40 मिलीमीटर बारिश का अनुमान लगाया गया है।

जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बनाए रखने और जान माल की हानि नहीं हो इसको सुनिश्चित करने के लिये सतर्क कर दिया गया है। राज्य सरकार ने दावा किया है कि प्रभावित इलाकों में खाद्यान की कोई कमी नहीं है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक बाढ़ प्रभावित इलाकों में गेहूं का स्टॉक 10043.3 मिट्रिक टन, चावल 12176.8 मिट्रिक टन, चीनी 837.3 मिट्रिक टन मौजूद है। इसके अतिरिक्त 344.2 किलोलीटर मिट्टी का तेल और 48943 एलपीजी सिलेंडर जिला स्तर पर मौजूद हैं। इसके अलावा राहत सामग्री लदे 309 ट्रकों को प्रभावित जिलों में रवाना किया गया है।

प्रभावित इलाकों में 9.4 लाख लीटर डीजल और 4.76 लाख लीटर पेट्रोल उपलब्ध कराया गया है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य सरकार ने राहत अभियान के लिये 103 करोड़ रपये जारी किया है। जिलाधिकारियों को राहत कार्यो के लिये धन खर्च करने में पूरी छूट दी गई है। इस बीच यहां ऐसी रिपोर्टें आ रही है कि गांवों के लोगों तक राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही है। सरकार भले दावा कर रही हो कि बारिश से प्रभावित इलाकों में सैकड़ों मीट्रिक टन राहत सामग्री गिराई गई हैं पर सड़कों से कटे गांवों में लोगों को अब भी इनका इंतजार है। रूद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिलों में तो प्रमुख राजमार्ग अब भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं।

मराठवाडा में अच्छी बरसात

सूखे से परेशान महाराष्ट्र के मराठवाडा इलाके में मंगलवार से लगातार बारिश हो रही है। मराठवाडा से मिली रिपोर्ट के अनुसार लातूर, हिंगोली, नांदेड़, बीड़, परभणी में कल शाम से अच्छी बारिश हो रही है। औरंगाबाद के उद्गीर तहसील में कल एक दिन में 100 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गयी। दक्षिण पश्चिम मानसून मराठवाडा क्षेत्र में सक्रिय है और अगले 24 घंटे में इस क्षेत्र में भारी बारिश का अनुमान है। मराठवाडा इलाके पिछले दो वर्ष से सूखे की चपेट में था लेकिन इस वर्ष जून से मौसम के शरू होने क ेसाथ ही इस क्षेत्र में अच्छी बारिश हो रही है और किसान खेतों मे बीज बो चुके हैं।

कर्नाटक में जनजीवन अस्त-व्यस्त

दक्षिण कर्नाटक के तटीय जिलों में तीन दिनों से लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने सामान्य जन जीवन को अस्त.व्यस्त कर दिया है जिससे इलाके के कई गांवों का अन्य क्षेत्रों से संपर्क कट गया हैं। कोडागु के भागमंडला में त्रिवेणी संगम कावेरी कन्नीका तथासुज्योति नदियों के जलमग्न हो जाने से 16 से भी ज्यादा गांवों का संपर्क टूट गया है। मेंगलूर तालुक के सोमनाथ उल्लवी इलाके से सौ से भी ज्यादापरिवारों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। तटीय इलाकों में कई जगह भूस्खलन होने के कारण हसन, मेंगलूर, करवार यशवंतपुर तथा हसन और मेंगलूर के बीच रेल सेवाओं को रद्द कर दिया गया है।

गोवा तथा कर्नाटक के बीच सडक मार्ग भी बाधित हो गया है। अधिकारियों ने कोडागु दक्षिण कन्नड, शिमोगा तथा चिकमंगलूर जिले के सभी विद्यालयों में छुट्टी की घोषणा कर दी है। मलनाड तथा कर्नाटक के तटीय इलाकों में बाढ की चेतावनी जारी कर दी गई है।

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