बारूद लाने वाले धमाके करने से नहीं आ रहे बाज

नवभारत न्यूज डिण्डौरी,

डिण्डौरी जिले के कुछ क्षेत्र आज भी नक्सल संभावित है और इसके साथ ही डिण्डौरी छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से लगा हुआ है। जहां आये दिन नक्षली वारदातें घटित होती रहती है।

ऐसी स्थिति में डिण्डौरी जिले के नक्सल संभावित क्षेत्रो तक बारूद की आसान पहुंच बेहद चिंतन का विषय है। इसके पहले भी अनेको दफा अखबारों के माध्यम से डिण्डौरी जिले के अन्य क्षेत्रों में बारूद बिछाये जाने की खबरें सामने आती रही है। फिर भी जवाबदारों द्वारा इस ओर कोई ध्यान नही दिया गया।

आलम यह है कि बारूद लाने-ले-जाने वाले अब नक्सल संभावित क्षेत्रो में भी धमाके करने से बाज नही आ रहे है। दरअसल मामला अमरपुर क्षेत्रान्तर्गत चारपानी मनोरी का है। जहां एक निर्माण एजेंसी द्वारा सेतु निर्माण हेतु संबंधित थाना क्षेत्र को कोई सूचना दिए बगैर ही, बडे पैमाने पर विस्फोटक का प्रयोग किया जा रहा है।

यह पहला मौका नही है। बल्कि इससे पहले भी अनेक निर्माण एजेेंसियो या ठेकेदार के द्वारा जिले में भारी तादाद में विस्फोटक का प्रयोग किया गया है। ऐसी स्थिति में यदि यह कहा जाये कि डिण्डौरी जिला नक्सल संभावित क्षेत्र होने के बावजूद बारूद के ढेर पर बैठा है तो कहना गलत नही होगा।

सघन वन क्षेत्र में हो रहे विस्फोट

संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा जिस क्षेत्र में सेतु निर्माण हेतु विस्फोटक का प्रयोग किया जा रहा है। वह अमरपुर चौकी और वन परिक्षेत्र अन्तर्गत आता है।

इसके अलावा उक्त क्षेत्र नक्सल संभावित क्षेत्रों की सूची में भी है और निर्माण स्थल के इर्द-गिर्द दोनो तरफ वन ग्राम लगे हुए है। जो विस्फोट किया जा रहा वह कक्ष क्रमाक 299 व कक्ष क्रमाक 300 बीट पिपरिया अन्तर्गत है।

नहीं है स्वीकृत

इस संबंध में मौके पर कन्ट्रक्शन कंपनी के सुपरवाईजर रामकिशोर विश्वकर्मा स्वीकृति व निर्माण संबंधी दस्तावेज मांगे गये, तो वह दस्तावेज उपलब्ध कराने में नाकाम रहा। क्योकि मौके पर कोई भी दस्तावेज नही थे। इसके अलावा संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी व थाना चौकी प्रभारी से जानकारी ली गई तो उन्होने ने भी बताया कि इस संबंध में उन्हे किसी प्रकार की सूचना नही दी गई।

कार्यवाही करने में की जा रही हीला-हवाली

इस बेहद संवेदनशील मामले पर चौकी प्रभारी और सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी, बीट गार्ड गुरूवार की सुबह ही उक्त स्थल पर पहुंचे थे। जहां पडताल उपरान्त विस्फोटक करना पाया गया। किन्तु मौके पर कोई भी जप्ती पंचनामा संबंधी कार्यवाही नही की गई। चूंकि मामला बेहद संवेदनषील है।

इसलिए जवाबदारों को फौरन ही कार्यवाही करनी थी। किन्तु जवाबदार सुपरवाईजर को मौके से उठाकर कार्यालय तक तो ले आये। किन्तु अधिनियम का ज्ञान न होने का व बाद में कार्यवाही करने का हवाला देते रहे। इस दौरान सुरपवाईजर द्वारा फोन के माध्यम से दो और लोगो को बुलाया गया। लेकिन वह भी विस्फोटक संबंधी दस्तावेज दिखाने मे नाकाम रहे।

गुमराह करने का प्रयास:-

उक्त जानकारी के संबंध में मौके पर गये बीट गार्ड और सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी से विस्फोटक संबंधी जानकारी की वस्तु-स्थिति जाननी चाही तो वह गुमराह करते नजर आये। बीट गार्ड के मुताबिक उसने शुरूआत में ही अपने वरिष्ठ अधिकारियों को मामले से अवगत करा दिया था।

जब सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी से पूछा गया तो वह भी गोल-मोल जवाब देते नजर आये एवं सारी जानकारी से उच्चाध्किारियो को अवगत कराने की बात करते रहे। और देर शाम तक कार्यवाही करने में नाकाम रहे।

इनका कहना है

मामला मेरे संज्ञान में आते ही मेरे द्वारा सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी और बीट गार्ड को निरीक्षण करने भेजा गया था, जो कन्सट्रक्षन कंपनी के सुपरवाईजर को लेकर आये है। चूंकि मामला वन परिक्षेत्र अन्तर्गत है और मेरे संज्ञान में आया है। तो दस्तावेज खंगालने के पश्चात ही कोई कार्यवाही की जायेगी।
गोरे लाल चौधरी
वन परिक्षेत्र अधिकारी अमरपुर

विस्फोटक की कोई भी जानकारी संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा मुझे नही दी गई। जो भी कार्यवाही है। वह वन विभाग करेगा।
संजय सोनवानी
चौकी प्रभारी अमरपुर

मामला मेरे संज्ञान में भी आया है। मैने संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी से दस्तावेज मंगाये है। उन्हे देखने के उपरान्त ही मै किसी निर्णय पर पहुंच पाऊंगा। और यदि जो भी इस मामले में दोषी पाया जाता है। उस पर नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी
लालजी मिश्रा
सामान्य वन मंडल अधिकारी डिण्डौरी

मै आज ही मौके पर किसी अधिकारी को भेजता हूॅ और यदि स्वीकृति नही है, व विस्फोटक का प्रयोग किया गया है, तो कार्यवाही की जायेगी।
अमित तोमर
कलेक्टर डिण्डौरी

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