मुंबई,

वित्तीय घाटे का गणित बिगड़ सकता है। सरकार ने जनवरी-मार्च के बीच बाजार से कुल 93 हजार करोड़ रुपये कर्ज लेने का एलान किया। इसका मतलब ये है कि सरकार अपने तय लक्ष्य से 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लेगी। बाजार उम्मीद से ये कर्ज कहीं ज्यादा है।

वित्तीय घाटा बढऩे की आशंका के सरकार सरकार जनवरी-मार्च में कुल 93000 करोड़ का कर्ज लेगी जिसमें 50000 करोड़ अतिरिक्त कर्ज होगा। सरकार गिल्ट्स के जरिए ये कर्ज लेगी। सरकार मार्च अंत तक टी-बिल्स घटाएगी। आरबीआई ने कहा है कि सरकार 1.79 लाख करोड़ के टी-बिल्स जारी कर सकती है। जनवरी-मार्च के बीच टी-बिल्स जारी हो सकते हैं।

सरकार ने 26 दिसंबर तक 5.21 लाख करोड़ रुपये का ग्रॉस मार्केट कर्ज लिया है। 26 दिसंबर तक सरकार का नेट मार्केट कर्ज 3.81 लाख करोड़ रुपये रहा है। जानकारों के मुताबिक ज्यादा उधारी का मतलब ये हैं कि 3.2 फीसदी वित्तीय घाटे का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होगा।

वित्तीय घाटे में 0.5 फीसदी तक की बढ़ोतरी संभव है। इससे आरबीआई दरों में कटौती की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। जीएसटी में टैक्स छूट में अब कमी संभव नहीं होगी। इसके साथ ही अब जीएसटी में टैक्स चोरी पर सख्ती हो सकती है।

सरकार पर कमाई बढ़ाने और खर्च कम करने का दबाव भी बढ़ेगा। जानकारों का कहना है कि बाजार में इस खबर के चलते बड़ी गिरावट की आशंका है। ये डेट, करेंसी और इक्विटी बाजार तीनों के लिए बुरी खबर है।

रुपया में भी कल गिरावट दिख सकती है। बाजार को 25 हजार करोड़ के अतरिक्त उधारी की उम्मीद थी। ज्यादा उधारी के चलते बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल संभव है।

उधर एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवायजर सौम्यकांति घोष का कहना है सरकार का ये कदम इकोनॉमी के लिए अच्छा साबित होगा। छोटी अवधि में खराब असर देखने को मिलेगा लेकिन लंबी अवधि में इसकी अच्छा असर दिखेगा।

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