बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतेश कुमार ने पुन: चुनाव जीतने व पदारूढ़ होने के अति उत्साह में यह घोषणा कर दी कि आगामी वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2016 से बिहार राज्य में पूर्ण नशाबंदी होगी और इससे राज्य की आमदनी में 4 हजार करोड़ रुपयों की कमी होगी. उद्देश्य भी महिला व गरीब कल्याण का बताया. शराब से सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं वर्गों को होता है. साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राज्य में शराबबन्दी 1977-78 में लागू की गयी थी, लेकिन वह सफल नहीं रही और फिर से शराब बिक्री प्रारंभ करनी ही पड़ी थी.

इसमें नया कुछ भी नहीं है और कुछ समय बाद इस बार फिर चालू की जा रही नशाबंदी भी इसलिए खत्म करना पड़ेगी कि इससे पूरे राज्य में बड़े जोरों से अवैध (कच्ची) शराब बनने व बिकने लगी है. शराबबन्दी का सबसे ज्यादा स्वागत वही वर्ग करता है जो अवैध शराब के धंधे में लिप्त रहता है. शराबबंदी से उसका अवैध शराब का धंधा तत्काल दिन दूना और रात चौगना हो जाता है और इसी अनुपात में पुलिस की ‘हफ्ता कमाईÓ भी बढ़ जाती है.

कुछ समय पूर्व आंध्र के मुख्यमंत्री श्री एन.टी. रामाराव के समक्ष महिलाओं ने प्रदर्शन करके शराबबंदी की मांग करते हुए बताया कि उनका पुरुष इस नशे में डूबकर घरों को डुबा रहा है. श्री रामाराव ने नशाबंदी लागू कर दी और वे उस वक्त हैरान हो गये कि जिन गांवों में महिलाओं ने मांग की थी, वहीं पूरे गांवों में अवैध शराब के केन्द्र बन गये और उसमें वही महिलाएं भी लिप्त थीं. उन्होंने फौरन नशाबंदी खत्म कर दी. वह उन गांवों के लोगों का बहुत बड़ी कमाई का ‘स्वरोजगारÓ था. नशाबंदी खत्म होते ही हजारों लोगों का यह ‘स्वरोजगारÓ ठप्प हो गया और वे बेरोजगार हो गये.

ठीक ऐसा ही हरियाणा में हुआ था जब मुख्यमंत्री श्री बंशीलाल ने वहां नशाबंदी की थी और उसे भी बाद में खत्म किया था. काफी पहले आजादी के बाद कई राज्यों में बाम्बे प्रेसीडेंसी, सेंट्रल प्राविन्स में नशाबंदी थी. जब तमिलनाडु में मुख्यमंत्री श्री अन्ना दुराई डीएमके सरकार सत्ता में आई तो उन्होंने भी गरीब व महिला वर्ग के हित में शराबबंदी लागू की. कुछ वर्षों तक चली भी थी और आज तमिलनाडु में शराबबंदी नहीं है.

1929 में अमेरिका में भी शराबबंदी की गयी थी. वहां भी अवैध शराब का ऐसा ज्वार आया कि जनता शराब में डूब गई और सरकार की कमाई डूब गई. लेकिन यह नितांत आवश्यक है कि नशाबंदी का सतत् प्रयास करते ही जाना चाहिये. यह बड़ी विनाशकारी है. भारत में अब इसके साथ-साथ तम्बाकू-गुटका और ड्रग्स भी आ गये हैं. आज पंजाब का यह हाल है कि वहां युवा वर्ग में ड्रग इतना फैल गया है कि वह राष्टï्रीय चिन्ता का विषय हो गया है कि आगे क्या होने जा रहा है.

केवल गुजरात में नशाबंदी है. वहां भी यह हालत है कि जब श्री शंकर सिंह बघेला वहां मुख्यमंत्री थे, उन्होंने पूरे हिम्मत व हौसले से यह स्वीकार किया कि यहां केवल इसलिये नशाबंदी है कि यह गांधी जी का राज्य है. जबकि हकीकत में यह है कि पूरे राज्य में कच्ची और ब्रांड वाली शराब मिल रही है.

संविधान के निदेशात्मक सिद्धांतों में अनिवार्य शिक्षा, समान नागरिक संहिता के साथ देश भर में नशाबंदी का भी निर्देश है. यह केन्द्र सरकार को करना चाहिये कि वे केन्द्रीय कानून व नीति से पूरे देश में एक साथ नशाबंदी लागू करें और राज्य उसे सख्ती से लागू करे. अभी हाल यह है कि जिस राज्य में नशाबंदी होती है और उसके पड़ोसी राज्य में नहीं है तो वहां से सप्लाई की भरमार हो जाती है. बिहार में भी यही होने जा रहा है.

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