दुबई,  भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की आज बोर्ड बैठक में प्रशासनिक ढांचे और राजस्व मॉडल दोनों ही मोर्चों पर करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड को आईसीसी बैठक में दोनों मोर्चों पर लगभग सभी सदस्यों ने नकार दिया.

बीसीसीआई ने आईसीसी पर दबाव बनाने के चक्कर में आईसीसी चैंपियंस ट्राफी के लिये अपनी टीम की घोषणा को टाल दिया था. लेकिन आईसीसी के सदस्यों पर इस दबाव का कोई असर नहीं पड़ा. प्रशासनिक ढांचे में बीसीसीआई के विरोध को 1-9 से हार का सामना करना पड़ा जबकि राजस्व मॉडल में भारतीय बोर्ड को 2-8 की शिकस्त मिली.

प्रशासनिक ढांचे के मामले में भारत के पक्ष में उसके प्रतिनिधि अमिताभ चौधरी का ही वोट आया जबकि राजस्व मामले में भारत का साथ सिर्फ श्रीलंका क्रिकेट के तेलंगा सुमतिपाला ने दिया. बीसीसीआई के लिये राजस्व में हिस्सेदारी सबसे बड़ा मुद्दा था और इस मामले में मिली हार भारतीय बोर्ड के लिये एक बड़ा झटका है. बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और आईसीसी के मौजूदा चेयरमैन शशांक मनोहर ने बीसीसीआई को उसी के खेल में मात दे डाली.

भारतीय बोर्ड आईसीसी में बिग थ्री फार्मेट के अपने पुराने राजस्व पर अड़ा हुआ था जिसकी स्थापना 2014 में की गयी थी. नये राजस्व मॉडल के तहत बीसीसीआई को 29 करोड़ डॉलर की हिस्सेदारी की पेशकश की गयी थी लेकिन बीसीसीआई अपनी 57 करोड़ डॉलर की हिस्सेदारी चाहता था जो पुराने राजस्व मॉडल में थी.

आईसीसी के अध्यक्ष शशांक मनोहर ने बीसीसीआई द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति के साथ पिछली बातचीत में भारतीय बोर्ड को अतिरिक्त 10 करोड़ डॉलर देने की भी पेशकश दी थी जिससे बीसीसीआई की हिस्सेदारी 40 करोड़ डॉलर पहुंच जाती.

लेकिन बीसीसीआई ने इस पेशकश को ठुकरा दिया था और अब उसे आईसीसी बोर्ड की बैठक में गहरा झटका भी लग गया. बीसीसीआई ने बैठक में दोनों प्रस्तावों के खिलाफ वोट किया जिससे साफ था कि आईसीसी में होने वाले परिवर्तन भारतीय बोर्ड को मंजूर नहीं है. बीसीसीआई को उम्मीद थी कि उसे जिम्बॉब्वे और बंगलादेश का समर्थन भी मिलेगा.

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