मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश के बीच बंटा हुआ भौगोलिक अंचल बुंदेलखंड हर गर्मी में अत्याधिक त्रासदी का क्षेत्र बन जाता है. यहां की भूगर्भीय रचना बड़ी-बड़ी चट्टानों से निर्मित है और यहां पत्थर खनन का काम बड़े पैमाने पर होता है. लेकिन यहां जल ोत काफी होने के बाद भी यह इलाका जल अभाव का बना रहता है.

लेकिन इस साल तो जल की समस्या सर्वाधिक तीव्र हो गयी है कि इसके ऐतिहासिक नगर महोबा को दूरदराज राजस्थान के कोटा जिले में स्थित बाणसागर बांध से स्पेशल टैंकर ट्रेन से पानी पहुंचाया जा रहा है. महोबा की ख्याति परमार कालीन युग योद्धा आल्हा और ऊदल की शौर्य गाथा से होती है. इस शहर की रस सागर और मदन ताल नाम के दो बड़े तालाब है. जिनका जिक्र आल्हा में भी आता है. पास में बेला ताल है, हमीरपुर में यमुना नदी है, बांदा में केन नदी, चित्रकूट में मंदाकिनी, धसान व बेतवा दो विशाल आकार में नदियां है. पास में ही माता टीला बांध है.

इन सबके बाद महोबा नगर को राजस्थान से पानी पहुंचाया जा रहा है. इसी से अंदाजा हो जाता है कि बुंदेलखंड में जल संकट और जल अभाव किस हद तक पहुंच गया है. यू.पी.ए. के शासन काल में कांग्रेस के उपाध्यक्ष श्री राहुल गांधी ने बुंदेलखंड का सघन दौरा किया और यहां विकास की रूपरेखा और उसकी जिम्मेवारी स्वयं अपने ऊपर ली थी. बुंदेलखंड के समग्र विकास के लिये विशेष योजना और बहुत बड़ा आर्थिक पैकेज दिया गया.

उस सबके बावजूद इस क्षेत्र में जल अभाव की विनाशलीला इतनी प्रबल हो गयी कि उसके एक जिला मुख्यालय के नगर महोबा को राजस्थान में स्पेशल टैंकर ट्रेन से पानी पहुंचाने की बाध्यता हो गयी है. यहां आंकलन हुआ है कि बुंदेलखंड में भूजल लगभग गायब है. इस साल यहां से इसी कारण बड़ी संख्या में लोगों का पलायन हो रहा है. और महंगाई चरम सीमा पर पहुंच गयी है.

एक अरसे से पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग भी की जा रही है. उसी से इसका एकीकरण और समग्र रूप से एक राज्य के रूप में विकास होगा. अभी इसके सागर, दमोह, टीकमगढ़, पन्ना, छतरपुर, दतिया जिले मध्यप्रदेश में और झांसी, जालौन, महोबा, बांदा, हमीरपुर जिले उत्तरप्रदेश में हैं. इन्हें एकीकृत रूप में एक राज्य का दर्जा दे दिया जाना चाहिए. जबकि आंध्र में तेलंगाना, उत्तरप्रदेश में उत्तराखंड, बिहार में झारखंड, मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ एकीकृत अंचल थे जिन्हें पृथक राज्य बना दिया है.

ऐसे में विभाजित बुंदेलखंड को उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश से निकाल कर और जोड़कर एक पृथक बुंदेलखंड राज्य का औचित्य सबसे ज्यादा है. इसके पिछड़ेपन व गहन समस्याओं का निदान इसका एकीकृत प्रशासन हो सकता है. श्री राहुल गांधी के विशेष आर्थिक पैकेज से भी इसकी समस्याओं का निदान नहीं हुआ.

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