राजधानी भोपाल में मजदूरी के साथ भीख मांगने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है. इनके घर तो होते नहीं है और ऐसी ठंड में भी यह लोग सड़कों की फुटपाथ पर या बंद दुकानों के सामने रातें गुजारते है.राजधानी में 15 रेन बसेरे चल रहे हैं.

इनमें गद्दे कंबल की व्यवस्थाएं हैं. लेकिन सारे बेघरों की संख्या को देखते हुए यह काफी कम है. यह भी किया जा सकता है कि ठंड के दिनों में कई जगहों पर बड़े-बड़े शेड डाल दिये जाए. इस मामले में शासन उदासीन तो नहीं है लेकिन व्यवस्था पर्याप्त भी नहीं है.

एक अनुमान यह भी लगाया गया है कि एक लाख की आबादी पर 500 लोगों की क्षमता का एक शेड के हिसाब से बसेरा शेड होना चाहिए. यह समस्या सारे देश में शहरों में आयी हुई है. केन्द्र सरकार की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 90 प्रतिशत बेघरों के पास आश्रय का कोई ठिकाना नहीं है.

देश भर में 1331 आश्रय स्थलों को बनाने की मंजूरी व फंड राज्यों को दे दिया गया था लेकिन अभी तक केवल 789 ही बनकर आश्रय देने का काम कर रहे हैं. दीनदयाल अन्त्योदय योजना के तहत देश के 790 शहरों में ये आश्रय बनाने जा रहे हैं.

रिपोर्ट में यह माना गया है कि देश में शहरी आबादी के बढ़ते बोझ के साथ ही बेघरों की संख्या में इजाफा होने से इन्हें आश्रय मुहैया कराना सरकारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.

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