नई दिल्ली. भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि तीन दिन बाद पहाड़ी राज्यों और नॉर्थवेस्टर्न और सेंट्रल इंडिया में बारिश होगी. एक एक्सपर्ट का कहना है कि बेमौसम बारिश से खेतों में पानी भरा हुआ है और इसके असर से फसल की यील्ड में 2 फीसदी से ज्यादा गिरावट आ सकती है. गौरतलब है कि इंडिया दुनिया का दूसरे सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक है. एक्सपर्ट ने कहा कि इस महीने और बारिश होने की आशंका का फसल पर क्या असर होगा, यह बता पाना अभी मुश्किल है.

कुछ हिस्सों में फसल को अधिक नुकसान पहुंच सकता है और गेहूं की क्वॉलिटी भी कमजोर हो सकती है. एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि सरसों, पीली मटर, चना, आलू और मोटे अनाजों जैसे रबी फसलों (सर्दियों में बोई जाने वाली) का उत्पादन भी गिर सकता है. करनाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ व्हीट एंड बार्ली रिसर्च की डायरेक्टर इंदु शर्मा ने बताया, मोटे अनुमानों के मुताबिक, फसलों को होने वाला नुकसान 5-7 फीसदी तक हो सकता है, इसका मतलब है कि यील्ड में 2 फीसदी की गिरावट दिख सकती है. शर्मा ने पूरे नॉर्थवेस्ट इंडिया की यात्रा की ताकि बारिश के चलते गेहूं की फसल को हुए नुकसान का आकलन किया जा सके. तस्वीर एक हफ्ते में साफ हो जाएगी.

ऐसे खेतों में जहां किसान पानी को खेत से बाहर निकालने में नाकाम रहे हैं, गेहूं की फसल खत्म होना शुरू हो गई है या इनमें यील्ड में गिरावट आ सकती है और दाने का रंग फीका पड़ सकता है. अभी यह कहना मुश्किल है कि इस हफ्ते के आखिर में बारिश की आशंका का फसलों पर कितना असर पड़ सकता है.

भारतीय मौसम विभाग ने 10 मार्च को कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बारिश होने की बात कही थी. डिपार्टमेंट ने यह भी कहा है कि तीन दिन बाद पहाड़ी राज्यों और नार्थवेस्टर्न और सेंट्रल इंडिया में भी बारिश हो सकती है.मार्च में भारी बारिश गेहूं की फसल के लिए बुरी खबर है. इस दौरान नॉर्थवेस्ट इंडिया में दाना फॉर्मेशन स्टेज पर होता है और सेंट्रल इंडिया में फसल कटाई की ओर होती है.

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के मलकपुर गांव के सुरेश पाल अपने 6 एकड़ के खेत में से 2 एकड़ में गेहूं पैदा करते हैं. फसल में 10 से 15 फीसदी की गिरावट की आशंका है, जबकि यील्ड प्रति एकड़ 7 क्विंटल पर रहने की संभावना है. उन्होंने 7 फीसदी इंटरेस्ट रेट पर 3 लाख रुपये का फार्म लोन लिया है और इस फसल से यह कर्ज चुकाना उनके लिए मुमकिन नहीं है.

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