arunनयी दिल्ली,  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकारी बैंकों की मदद का आश्वासन देते हुये आज कहा कि बैंकों को सशक्त बनाने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की जरूरत है ताकि वे जोखिम में फँसे ऋण पर मजबूत शर्तों पर समझौते करने में समर्थ हों। श्री जेटली ने यहाँ बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि बैठक में बैंकों को सशक्त बनाने पर विचार-विमर्श किया गया है।

इस संबंध में बैंक प्रमुखों से सुझाव माँगे गये हैं। इस दौरान ऋण उठाव, गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) की स्थिति और बैंकों के विस्तार पर चर्चा हुई है। उन्होंने सरकारी बैंकों के खराब परिणाम तथा उनके बढ़ते एनपीए के संदर्भ में सभी आशंकाओं का खारिज करते हुये कहा कि बैंकों को अच्छा परिचालन लाभ हो रहा है। वर्ष 2015-16 में बैंकों को जोखिम में फंसे रिण के लिए अधिक प्रावधान करने की वजह से 18 हजार करोड रुपये का नुकसान हुआ है।

वास्तव में सरकारी बैंकों को वर्ष 2015-16 में 1.40 लाख करोड़ रुपये का परिचालन लाभ हुआ है जिससे यह पता चलता है कि जिस तरह की बैंकों की तस्वीर पेश की जा रही है वह वैसी है नहीं। सरकार का यह मानना है कि कुछ क्षेत्र विशेष के खातों की वजह से एनपीए की यह स्थिति बनी है।

सरकारी बैंकों का सकल एनपीए गत वित्त वर्ष की समाप्ति पर 31 मार्च को बढ़कर 5,30 लाख करोड़ पर पहुँच गया। इसके लिए किये गये प्रावधान के कारण 14 सरकारी बैंक नुकसान में रहे। उनका कुल नुकसान 25,485 करोड़ रुपये रहा। साथ ही भारतीय स्टेट बैंक समेत अन्य सरकारी बैंकों के मुनाफे में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।