न सिर्फ भारत के उद्योग-व्यापार जगत बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था में एक लंबे अर्से से रिजर्व बैंक द्वारा बैंक ऋण की दरों को अन्य देशों की तुलना में काफी ऊपर रखने की समस्या से त्रस्त बना हुआ है. रिजर्व बैंक का आंकलन व निर्णय पूरी तरह कृषि क्षेत्र के उत्पादन और खाद्यान्नों के रिटेल मूल्यों में वृद्धि व खाद्यान्न मुद्रा स्फीति पर ही आधारित बना हुआ है. रिजर्व बैंक को किसी एक सेक्टर (कृषि व खाद्यान्न) को केंद्र बिन्दु में रखकर बैंक दरें तय करने से दूसरे किसी सेक्टरों खासकर उद्योग जगत के मेन्युफेक्चरिंग क्षेत्र पर बहुत बुरा असर पड़ा. देश की औद्योगिक विकास दर घटकर रिकार्ड गिरावट में 4 प्रतिशत
रह गयी.

इस समय चीन में मुद्रा युआन के अवमूल्यन और आर्थिक गिरावट आयी हुई है. साथ में यूरोप के सभी देशों में अनायास ही भारी संख्या में सीरिया के शरणार्थी शरण लेते जबरन घुस पड़े है. वहां राजनैतिक के साथ-साथ बहुत बड़ा आर्थिक संकट आ गया है. पूरे अरब राष्टï्रों में ‘इस्लामिक स्टेटÓ आतंकी संगठन ने पूरे मुस्लिम राष्टï्रों को अस्त-व्यस्त व ध्वस्त कर
रखा है.

ऐसे निराशा के वातावरण में इस समय केवल भारतीय अर्थव्यवस्था सारी दुनिया में सबसे स्थिर व सुदृढ़ नजर आ रही है. इस समय अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा बैंकों में आने वाली पूंजी-निवेश पर ब्याज दरों को नहीं बढ़ाने के निर्णय से भी भारत में विदेशी निवेश का वातावरण बना है. इस समय खाद्यान्न मुद्रास्फीति व खाद्यान्नों के रिटेल भाव भी नियंत्रण में है. हमारे निर्यात की स्थिति अवश्य ही बहुत विपरीत चल रही है. वैश्विक बाजारों में वस्तुओं के भाव काफी नीचे चल रहे हैं. इनमें शक्कर भी एक है इसलिए भारत को शक्कर का निर्यात करना घाटे का सौदा हो गया. दूसरी ओर देश में आंतरिक जरूरत से 50 लाख टन शक्कर का उत्पादन ज्यादा हो गया. शक्कर मिलों की यह हालत हो गयी है कि निर्यात बाजार खत्म है और भारी स्टाक हो जाने से उसे देश के बाजारों में लागत से कम दामों में शक्कर बेचने का भारी घाटा हो रहा है. इस उद्योग को शीघ्र ही निर्यात बाजार चाहिए जो उसी समय अन्तरराष्टï्रीय भावों के अनुसार हो पायेगा जब सरकार उसे एक्सपोर्ट सब्सिडी दे और रिजर्व बैंक दरें घटाये. इस समय आधारभूत प्रभाव से रिटेल कीमतें 5.5 प्रतिशत नीचे आयी है और रिटेल मूल्यों का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 3.66 पर आ गया है.

आगामी मौद्रिक समीक्षा की पृष्ठïभूमि में रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री रघुराम राजन ने केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली से भेंट की. केन्द्र सरकार की यही मंशा है कि इस समय विश्व की स्थितियों में भारतीय अर्थ-व्यवस्था की स्थिति बहुत ही मजबूत बन गयी है. विकास दर पिछले साल की 7.3 प्रतिशत से ज्यादा रहेगी. वित्तीय घाटा भी 1.2 प्रतिशत पर आ गया है. इस स्थिति का लाभ उठाने के लिये हमें विदेशी निवेश को बढ़ाने का अवसर आ गया है. घरेलू निवेश इतना नहीं है कि उससे विकास को गति दी जा सके. इस समय सबसे बड़ी जरूरत रेलवे में निवेश की है जो बहुत बड़ी धनराशि का होता है. इसमें जितना निवेश आने की उम्मीद थी वह नहीं आया है. विकास में सबसे ज्यादा हमें सड़क, रेल, हवाई यातायात का विकास करके विकास की संरचना विकसित करनी है. ऐसी आशा की जा रही है कुछ ही दिनों में रिजर्व बैंक जो अपनी मौद्रिक समीक्षा करने जा रहा है उसमें बैंक दरों को घटायेगा.

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