• पहले चूल्हा-चौका करती थी अब चलाती है लैपटॉप
  • समूह प्रबंधन के कार्य ने दिखाया नया रास्ता

भोपाल,

सागर जिले में विकासखण्ड बंडा के ग्राम बीजरी में कक्षा 12वीं तक शिक्षित कविता लोधी ब्याह कर ससुराल आई. ससुराल में ग्रामीण परिवेश मिला. रोज चूल्हा-चौका, खेती-किसानी में जिन्दगी गुजारने लगी.

कविता के पति लोकपाल लोधी चक्का गाड़ी में बंडा से पत्थर भरकर राजस्थान ले जाते और लौटते में जो माल मिलता, वापस लेकर आते. महिने में 7-8 दिन ही परिवार के साथ गुजारने को मिलते थे, बाकी समय रोजी-रोटी कमाने में बीत जाता था.

आजीविका मिशन आने पर कविता ने चंडी माता स्व-सहायता समूह की सदस्यता ली. पैसे बचाना, बैंकिंग, समूह प्रबंधन के कार्य ने उसे नया रास्ता दिखाया. धीरे-धीरे कविता गांव के अन्य समूहों का हिसाब-किताब लिखने लगी.

गांव में गठित सभी समूहों में सम्मानित सदस्य की हैसियत से पहचानी जाने लगी. कविता को मिशन के माध्यम से राजगढ़ बैंक सखी के कार्यों को देखने का अवसर मिला, तो कुछ रकम समूह से ली और बाकी रकम जेब से मिलाकर लेपटॉप खरीदा.

आजीविका मिशन से उसे अब बैंक सखी का नाम मिला. कविता ने अपने घर से 4 कि.मी. दूर रोज अप-डाउन कर एक माह का कम्प्यूटर प्रशिक्षण लिया. फिर एक सप्ताह तक कियोस्क संचालक के साथ लेपटॉप चलाना सीखा. शेष बची कमी को पूरा करने के लिये एक अन्य साथी की मदद ली.

अब कविता एक दक्ष कियोस्क संचालक है. अब तक कविता ने अपने गांव के बाकी बचे सभी आधार कार्ड बैंक खातों से लिंक करवा दिये हैं, 25 नये खाते खुलवाए हैं. गांव के लोग 3 किमी. दूर बैंक जाकर पैसा जमा करने की तुलना में कविता के पास आकर जमा करना आसान समझते हैं. कविता की गांव में बैंक वाली बहनजी की पहचान है.

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