bpl1भोपाल,  बच्चों का मन अगर किसी काम में लग जाए तो वह उसे शिदï्दत से पूरा करते है, फिर बच्चों का तीव्र दिमाग उस कार्य को शानदार तरीके से करता है.

दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय में बैले एवं कंटेम्पररी डांस के वर्कशाप का आयोजन किया जा रहा है जिसमें 5 साल के बच्चों से लेकर 40 साल तक के लगभग 40 युवा शामिल हैं वर्कशाप से बड़ों से अच्छा प्रदर्शन बच्चे कर रहे हैं.

बच्चे अपने डांस को लेकर सीरियस रहते हैं और जल्दी स्टेप्स भी सीख जाते है. वर्कशाप के प्रशिक्षक योगेन्द्र सिंह राजपूत ने बताया कि बैलें डांस के काफी प्रैक्टिस के बाद भी बच्चों में उत्साह भरा रहता है. वह सभी स्टेप्स को क्लीयर करते है तथा उनका एक्सप्रेशन भी काफी सराहनीय है.

बच्चों को स्टेप्स सिखाने में थोड़ा समय लगता है उनके साथ काम करने के पेसेन्स की आवश्यकता होती है क्योंकि हम बच्चों पर ज्यादा प्रेशर नहीं दे सकते. लेकिन बच्चों में सीखने की ललक है और वह बहुत अच्छा कर रहे हैं. योगेन्द्र ने बताया कि 11 जून को होने वाले बैले डांस के परफारमेंस की पूरी तैयारी हो चुकी है. बैले द्वारा हम, रिजींग सन्स रिस्पेक्ट वुमेन को प्रस्तुत करेंगे. डांस में म्युजिक के साथ डायलॉग भी शामिल है.