bpl2भोपाल,  रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल ने आज रविवार को कोच फैक्ट्री में मॉडल कोच का निरीक्षण किया और इस पर संतोष प्रगट करते हुए कहा कि आल इज वेल. लेकिन चेयरमैन यहीं नहीं रूके और उन्होंने कहा कि फैक्ट्री के कामकाज में अभी भी सुधार की गुंजाइश तो है ही, उस पर ध्यान दिया जाए.

चेयरमैन रविवार को एक दिवसीय मण्डल के दौरे पर आये. अध्यक्ष रेलवे बोर्ड ए.के.मित्तल का हबीबगंज स्टेशन पर पश्चिम मध्यरेल के महाप्रबंधक रमेशचंद्रा ने स्वागत किया. स्वागत उपरान्त रेलसुरक्षा बल द्वारा अध्यक्ष रेलवे बोर्ड को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया . इस अवसर पर मण्डल रेलप्रबंधक आलोककुमार भी उपस्थित थे.

अध्यक्ष रेलवे बोर्ड मित्तल ने हबीबगंज स्टेशन पर सवारी डिब्बा पुर्ननिर्माण कारखाना, निशातपुरा द्वारा निर्मित मॉडल कोचों का विस्तृत निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान कोच के अन्दर उपलब्ध सुविधाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा आल इज वेल. परन्तु कुछ छोटी-छोटी कमियों ंको दूर करने के निर्देश दिये. जिसमें टायलेट के पास भी फिसलने के डर, यहां भी कारपेट बिछाना चाहिए था. वहीं कुछ मिरर ठीक से नहीं लगे दिखे, उन्हें सुधार के निर्देश दिए के साथ अन्य खामियों को दूर कर मॉडल कोच रैक को दिल्ली रवाना करने के निर्देश दिए .भविष्य में इन सुविधा युक्त कोचों को यात्रियों द्वारा और अधिक पसंद किया जाये. इसके लिये इसमें और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जायेंगी. मॉडलकोच के निरीक्षण के दौरान भोपाल सांसद आलोक संजर भी उपस्थित थे.

अत्याधुनिक हैं कोच
निशातपुरा भोपाल में बने अत्याधुनिक मॉडल कोच में 24 मॉडल कोच हैं. इसमें एसएलआर, सामान्य, थ्री व टू टायर एसी कोच हैं. समस्त कोचों में अत्याधुनिक एलएडी लाईट लगाई गई है. कोचों में घर की तरह टायलेट, डे्रसिंग मिरर, समस्त कोचों में कारपेट बिछा हुआ है. साथ ही मुंबई से बुलाई गई बेहतरीन किस्म की कुशन का सीटों में उपयोग किया गया है. इसी के साथ अन्य प्रकार की घर जैसी सुविधांए मौजूद हैं.

110 की रफ्तार से दौडे
हाल ही मैं सोमवार के दिन सुबह 09:45 पर भोपाल से गंजबासौदा स्टेशन के बीच 110 की रफ्तार से यह मॉडल रेक कोच दौडे थे. जिन्हें देख लोगों ने कहा था वाह क्या ट्रेन है. इसके बाद यह मंगलवार रात जबलपुर के लिए रवाना हो गई थी. जहां मध्य रेल महाप्रबंधक रमेश चंन्द्रा द्वारा इसका निरीक्षण किया गया था. इससे पूर्व नवबंर 2015 में भी यह पटरी पर बीना तक दौड़ती दिखाई दी थी. उस वक्त इसमें कुछ खामियां नजर आईं थी.

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