rajan1वॉशिंगटन. रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने नीतिगत दर में कटौती का संकेत देते हुए कहा है कि केन्द्रीय बैंक अभी भी समायोजन के दौर में है और मुद्रास्फीति तथा वृहद आर्थिक आंकड़ों के आधार पर आगे निर्णय करेगा. जैकसन होल शिखर बैठक के दौरान राजन ने कहा कि हमने यह नहीं कहा है कि नीतिगत दर में कटौती पर हमारा काम पूरा हो गया. हम आंकड़ों के आधार पर आगे निर्णय करेंगे.

राजन ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति है जो कि अन्य अर्थव्यवस्थाओं में नहीं है. हमने इस साल अब तक तीन बार दर में कटौती की है और अभी भी हम ताल मेल बिठाने के चरण में है. हमारी आने वाले आंकड़ों पर नजर रहेगी और उसकी के अनुरूप आगे फैसला करेंगे. राजन ने यह भी कहा कि दर तय करने के लिए मौद्रिक नीति समिति बनाने के मुद्दे पर रिजर्व बैंक की सरकार के साथ सहमति बन गई है. इसकी जल्द घोषणा की जाएगी.
राजन यहां कांसास सिटी फेडरल रिजर्व की जैकसन होल आर्थिक संगोष्ठि में भाग लेने आए हैं. यह वही समिति है जिसमें राजन ने एक बार बहुचर्चित दस्तावेज पेश किया था जिसमें उन्होंने 2007-08 में विश्व बाजार में वित्तीय संकट का अनुमान व्यक्त किया था. उस समय राजन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुख्य अर्थशास्त्री थे. नीतिगत दर में और कटौती को लेकरराजन पर लगातार सरकार और उद्योग जगत का दबाव बना हुआ है.

चीन के मुद्दे पर राजन ने कहा, भारत बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है, लेकिन फिर भी चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती का असर इतना ज्यादा नहीं होगा जितना कि अन्य देशों का होगा. रघुराम राजन ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक को ब्याज दरों में ऐसे समय वृद्धि को लेकर आगाह किया जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल चल रही है.
उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि जब दुनिया में उथल-पुथल है, आप ऐसा मत कीजिए. इस बारे में लंबे समय से अनुमान जताया जा रहा है, यह कभी-न-कभी होना है, हर कोई यह जानता है लेकिन इस संबंध में समय के हिसाब से कदम उठाया जाए. अलग से ब्लूमबर्ग टीवी के साथ बातचीत में राजन ने कहा कि केंद्रीय बैंक नई मौद्रिक नीति समिति पर सरकार के साथ समझौते पर पहुंच गया है.
उन्होंने कहा कि समिति प्रस्तावित मसौदे से अलग होगी जिसमें सरकार को बहुसंख्यक सदस्यों को नियुक्त करना था. हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया. उल्लेखनीय है कि सरकार के मसौदा प्रस्ताव में दिए गए सुझाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. इसके तहत रिजर्व बैंक के गवर्नर की अध्यक्षता वाली समिति में बहुसंख्यक सदस्यों की नियुक्ति सरकार करती. साथ ही चेयरमैन के पास वीटो शक्ति देने के पूर्व प्रस्ताव को भी वापस लेने पर जोर दिया गया था. हालांकि, बाद में राजन ने कहा कि उन्हें वीटो शक्ति को हटाये जाने के विचार से कोई परेशानी नहीं है. फिलहाल रिजर्व बैंक गवर्नर के पास तकनीकी परामर्श समिति है जो मौद्रिक नीति पर परामर्श देती है, लेकिन उनके पास समिति की बातों को स्वीकार करने या उसे खारिज करने का अधिकार है. रिजर्व बैंक के गवर्नर ने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में आशावाद का माहौल है और चीनी समस्या से सबसे कम प्रभावित देशों में से एक होगा.

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