विश्व की तेजी से उभरती पांच संभावनाशील अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के संगठन ब्रिक्स के गोवा में आयोजित सम्मेलन में भारत की पुरजोर कोशिश आतंकवाद के मुद्दे को उठाने की रही. इस समिट में शामिल सभी देश भले ही एक सुर से सीमा पार से जारी आतंकवाद के खिलाफ न बोले हों, मगर आतंकवाद के खिलाफ अलग-अलग बात कर पाकिस्तान को कड़ा संदेश जरूर दे दिया है.

भारत की यह कामयाबी रही कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वह ब्रिक्स देशों की साझा नीति बनाने में कुछ हद तक कामयाब भी रहा. आतंक वाद से निपटने के लिए भारत ने संयुक्त राष्टï्र में सीसीआईटी की पहल की थी, सीसीआईटी यानि कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म, लेकिन संयुक्त राष्टï्र के सदस्य देशों के बीच आतंकवाद की परिभाषा को लेकर मतभेदों के कारण भारत की यह पहल वहां रंग नहीं ला सकी थी, लेकिन सीसीआईटी के लिए उसके प्रयासों ने ब्रिक्स देशों की समिट में जरूर असर दिखाया.

ब्रिक्स समिट के पहले ही चीन ने यह कहक र भारत के लिए कुछ मुश्किल खड़ी करने की कोशिश की थी कि मसूद अजहर को संयुक्त राष्टï्र की तरफ से आतंकी करार देने के मुद्दे पर उसका स्टैंड पहले की तरह ही रहेगा. पाक के प्रति चीन के जगजाहिर रूख को देखते हुए भारत को अभी भी कम ही उम्मीद है कि संयुक्त राष्टï्र में वीटो पावर रखने वाला चीन भारत की चिन्ताओं को समझेगा.

ब्रिक्स समिट के दौरान ही भारत ने रूस के सामने भी आतंकवाद का मुद्दा उठाया है. रूस भारत का पुराना भरोसेमंद सहयोगी और रक्षा साझेदार रहा है, लेकिन भारत के लिए रूस का रूख हाल के दिनों में संतोषप्रद नहीं रहा है. कश्मीर में उड़ी के सेना कैम्प पर आतंकी हमले के बाद रूस पाक के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास कर चुका है और भारत ने इस पर नाराजगी जताई थी, इसके बाद रूस ने सैन्य अभ्यास की जगह बदल दी थी.

भारत के लिए यह चिन्ताजनक बात थी कि पाक के अस्तित्व में आने के बाद से रूस ने उसके साथ पहली बार संयुक्त सैन्य अभ्यास किया था. मोदी ने पुतिन के समक्ष यह मुद्दा उठाया है. शनिवार को ही गोवा में भारत-रूस शिखर सम्मेलन भी हुआ है जिसमें तेल और गैस क्षेत्र में साथ-साथ विकास का संकल्प लिया गया है. इससे जाहिर होता है कि भारत-रूस के संबंधों में गर्मजोशी बनी रहेगी और सीमा पार आतंकवाद के मसले पर भारत को रूस का समर्थन हासिल होगा ही.

गोवा में पुतिन से मुलाकात के बाद मोदी का यह कहना महत्वपूर्ण है कि एक पुराना दोस्त दो नए दोस्तों से बेहतर होता है. पाक के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास की बात को छोड़ दें तो आतंकवाद से लड़ाई में भारत-रूस की सोच एक जैसी उभर कर सामने आई है. आतंकियों और उनको मदद करने वालों के खिलाफ ब्रिक्स के ज्यादातर देश जीरो टालरेंस की नीति अपनाने पर सहमत हैं.

भारत के लिए यह सुखद बात है कि पाक प्रायोजित आतंकवाद के मसले पर भारत ब्रिक्स के दो अन्य सदस्य देशों ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका का समर्थन प्राप्त करने में कामयाब रहा है. भारत ने ब्रिक्स के जरिए पाक को दुनिया से अलग-थलग करने की मुहिम को आगे बढ़ाया है और इस मुहिम में भारत को आशातीत सफलता भी मिली है.

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