सीमा पर चलें बख्तरबंद गाडिय़ां

नई दिल्ली,

पाक और चीन से बढ़ती चुनौतियों के बीच सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सीमा पर बख्तरबंद गाडिय़ों को चलाने की क्षमता पर जोर दिया है.

उन्होंने कहा कि इलाके के स्वरूप में बदलाव आ रहा है और ऐसे में भविष्य में होने वाली जंग के लिए हमें खुद को तैयार रखना होगा. जनरल बिपिन रावत ने जोर देकर कहा कि युद्धक टैंक जैसी बख्तरबंद गाडिय़ों में पश्चिम के साथ-साथ उत्तरी सीमा पर भी संचालित किए जाने की क्षमता होनी चाहिए.

रावत ने कहा कि भविष्य में होने वाली युद्ध की प्रकृति मिलीजुली होगी और सुरक्षा बलों को इससे निपटने के लिए क्षमता निर्माण की जरूरत है. वह यहां फ्यूचर आर्मर्ड वीइकल्स इंडिया 2017 पर आयोजित सेमिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे.

थलसेना प्रमुख ने कहा कि थार मरुस्थल का कुछ हिस्सा सख्त हो रहा है. नहरों के विकास के साथ बंजर जमीनें हरी हो गई हैं और जनसंख्या घनत्व बढ़ गया है, जो चुनौतियां पेश कर रही हैं.

रावत ने कहा, नहर प्रणाली के विकास के साथ हमें पुलों की जरूरत पूरी करनी है और यह देखना है कि ये बख्तरबंद गाडिय़ां किस तरीके से वहां काम कर पाएंगी. लिहाजा, मैं कहता हूं कि लड़ाई का मैदान जटिल हो जाएगा…..इलाके में जटिलताएं बढ़ जाएंगी.

उन्होंने कहा कि भविष्य चाहे जो भी हो बख्तरबंद गाडिय़ों में ऐसी क्षमता होनी चाहिए कि वे पश्चिम के साथ-साथ उत्तरी सीमा पर भी काम करने में सक्षम हों. जनरल रावत ने कहा, लिहाजा, हम जो भी हथियार इस्तेमाल करने वाले हैं, वह दोनों मोर्चों पर काम करने में सक्षम होने चाहिए.

रावत ने उल्लेख किया कि थलसेना आधुनिकीकरण की तैयारी में है और इसकी एक समयसीमा होनी चाहिए. गौरतलब है कि थलसेना 2025-2027 से आधुनिक टैंकों और आईसीवी (इन्फैंटरी कॉम्बैट वीइकल) का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है.

रावत ने कहा, यह ऐसा समय है जब हम कोई गलती नहीं कर सकते. हम क्या चाहते हैं, क्या क्षमताएं हैं और वास्तव में हमें क्या चाहिए यह फैसला करना होगा. हमारे पास दिन और रात में काम करने की क्षमता होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसा करते वक्त सेना की जरूरतों को ध्यान में रखना होगा.

 

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