नए साल में सरकार का संदेश

नई दिल्ली,

नरेंद्र मोदी सरकार टैक्स चोरों के पीछे पड़ गई है. नए साल में टैक्स चोरों को सरकार का स्पष्ट संदेश है- कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितना दूर तक भागते हैं, हम आपको पकड़ ही लेंगे.

इसके लिए सरकार बिग डेटा का सहारा ले रही, लेकिन जब इससे भी पूरी संतुष्ट नहीं मिली तो उसने टैक्स चोरों का पता लगाने के नियम ही बदल दिए. जीएसटी से जुटाए आंकड़ों को इनकम टैक्स छिपानेवालों के खिलाफ इस्तेमाल करने की सरकार की योजना टैक्स चोरों के लिए एक और बड़ा सिरदर्द साबित होनेवाला है.

दरअसल, सरकार एक डेटाबेस तैयार करना चाह रही है जिसमें कंपनियों और उनके प्रमोटरों की कमाई को उनकी ओर से फाइल जीएसटी रिटर्न से मिलाया जा सके. ऐसा पहली बार होगा कि सरकार इनकम टैक्स फाइलिंग को इनडायरेक्ट टैक्स डेटा से इतने बड़े पैमाने पर मिलान करेगी.

कहीं से भी पता जुटा सकेंगे टैक्स अधिकारी

नए नियम से टैक्स अधिकारियों को बैंकिंग, इंश्योरेंस और स्थानीय निकायों में जमा किए गए डेटा का इस्तेमाल टैक्स चोरों का पता लगाने में करने का अधिकार मिल गया है. अब छिपे या लापता टैक्स चोरों को उनके पते पर इनकम टैक्स नोटिस भेजकर उनसे टैक्स डिमांड की जा सकेगी.

अब तक टैक्स अथॉरिटीज को टैक्सपेयर की ओर से मुहैया कराए गए पर्मानेंट अकाउंट नंबर (पैन), इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) में दर्ज पते या अन्य टैक्स रिलेटेड कम्यूनिकेशन पर ही नोटिस जारी कर सकते थे. इससे टैक्स अधिकारियों को उन टैक्स चोरों को नोटिस भेजने में मदद नहीं मिलती थी जो पता बदल लेते थे और पुराने पते पर भेजा गया नोटिस वापस कर दिया जाता था.

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