11as1भोपाल, संपूर्ण क्रांति के जनक, भारत रत्न, लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 113 वीं जयंती को प्रदेश के सभी संभागों एवं संगठनात्मक जिला केन्द्रों पर ”लोकतंत्र रक्षा दिवस” के रूप मनाया गया.संभाग एवं जिला केंद्रों पर संगोष्ठियों का आयोजन कर मीसाबंदियों का सम्मान किया गया.

भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यालय पं. दीनदयाल परिसर में आयोजित अभिनंदन समारोह में बड़ी संख्या में बिहार, पूर्वांचल, मिथ्लाचंल, सीमांचल और झारखंड के परिवारजन भी शामिल हुए और लोकनायक जयप्रकाश नारायण को श्रद्धांजलि अर्पित किए.पार्टी प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, प्रदेश संगठन महामंत्री अरविन्द मेनन ने मीसाबंदियों को शाल-श्रीफल भेंट करते हुए पुष्प-मालाओं से उनका स्वागत किया.मीसाबंदी संघ के प्रदेश अध्यक्ष व पार्टी के प्रदेश मंत्री तपन भौमिक, प्रदेश मंत्री मदनमोहन गुप्त, मीसाबंदी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष भरत चतुर्वेदी, विधायक सुरेन्द्रनाथ सिंह, सत्यार्थ अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, विकास विरानी ने लोकतंत्र रक्षक सेनानियों का हार्दिक अभिनंदन किया.
इस अवसर पर तपन भौमिक, सुरेन्द्र द्विवेदी, भरत चतुर्वेदी, नानकराम वाधवानी, बाबूलाल भानपुरे, मनोहर पाठक, मधुकर हर्णे, अशिविनी यादव सहित अन्य मीसाबंदियों का अभिनंदन किया गया.

तपन भौमिक ने संघ की ओर से मीसाबंदियों का स्वागत करते हुए आपातकाल की दु:खद स्मृतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वास्तव में वह लोकतंत्र प्रेमियों की कड़ी परीक्षा का काल था, उनके उद्भट साहस का ही फल है कि हम आज स्वतंत्र वातावरण में सांस ले रहे है.कार्यक्रा संचालन अशोक सैनी ने किया.

इस मौके पर नंदकुमार सिंह चौहान ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण को विराट व्यक्तित्व और दूरदर्शिता की दृष्टा निरूपित करते हुए कहा कि भारतीय जनसंघ ने आनन-फानन में जनता पार्टी में विलीन होने का निश्चय किया, सारी प्रक्रिया जेल के परिसर में ही संपन्न हुई थी.सबसे बड़ी समस्या इंदिरा गांधी की तानाशाही को समाप्त कर लोकतंत्र की स्थापना करना था.भारतीय जनसंघ और भाजपा जनसेवा, समर्पण और राष्ट्रीयता के मुद्दे पर बड़ी से बड़ी कुर्बानी देती आ रही है.उन्होंने कहा कि यह लोकनायक के व्यक्तित्व की विशेषता थी कि उन्होनें चंबल के दुर्दान्त डकैतों को शांति के मार्ग पर लाने के लिए उनका हृदय परिवर्तन किया,इससे चंबल, ग्वालियर, बुंदेलखंड अंचल में शांति की पुर्नस्थापना हुई, इसका श्रेय जयप्रकाश नारायण को जाता है.वे महान क्रांति के जनक थे.

आज उनकी जन्मस्थली बिहार ऐसे तत्वों के शोषण का शिकार है जो लोहिया और लोकनायक की विरासत का दावा करके आदर्शों के साथ विश्वासघात कर रहे है.बिहार को शोषक तत्वों से मुक्त कराना लोकनायक के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.उन्होंने मप्र में रहने वाले बिहार के लोगों से आग्रह किया कि वे बिहार में शोषकों से मुक्ति के लिए भाजपा को सहयोग करें.