विश्व बैंक का आर्थिक आंकलन है कि भारत 7.5 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि के साथ अधिकारिक तौर पर चीन को पार कर सकता है. चीन की वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है. विश्व व अन्य विकसित देशों की वृद्धि दर इस साल 2015 में 4.4, सन् 2016 में 5.2 और 2017 में 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है. दक्षिण एशिया में वृद्धि दर इस साल 6.1 प्रतिशत बरकरार रहने की उम्मीद है जिसका नेतृत्व भारत में आर्थिक सुधार की गति करेगी. भारत में नये सुधार से कारोबार तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है और नया पूंजी प्रवाह आकर्षित हो रहा है. इससे उसकी विकास दर में वृद्धि निश्चित हो गया है. अभी तक भारत की विकास दर 6.4 प्रतिशत होने के अनुमान थे लेकिन अब जो आर्थिक गतिविधियों से बढ़त आयी है उसके कारण इसे बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर आंका गया है.

इन दिनों भारत में और भारत के बाहरी देशों में भारत और चीन की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाएं दिख रही हैं. लेकिन इन्हें प्रतिस्पर्धी अर्थ व्यवस्था मानना बिलकुल ही ठीक नहीं लगता. हर देश अपने अपने देश की भौगोलिक, राजनैतिक व आर्थिक परिवेश में प्रगति करता है. उससे कहीं भी यह फेक्टर होता ही नहीं है कि पड़ोसी राष्टï्र मेंं क्या कैसे आर्थिक विकास हो रहा है. हर राष्टï्र की जरूरत और प्रवृत्ति भी अलग होती है. केवल सैनिक मामलों में दो राष्टï्र या कई राष्टï्रों में इसलिए प्रतिस्पर्धा रहती है कि हमले, युद्ध या बिगड़ते हुए संबंधों में देश पर युद्धजनित खतरा
नहीं हो.

भारत और चीन के राजनैतिक व संवैधानिक स्वरूप अलग-अलग हैं. भारत 1947 में आजाद हुआ और चीन में 1949 में गृह क्रांति हुई जिससे कम्युनिस्ट व्यवस्था स्थापित है. उसका स्वरूप अधिनायकवाद और तानाशाही का मिलाजुला रूप होता है.

भारत ने आजादी के बाद औद्योगिक क्षेत्र में राष्टï्रीयकरण, परमिट-लायसेंस की व्यवस्था को अपनाया. निजी उद्योग व निजी पूंजी के स्थान पर सरकारी उपक्रम और सार्वजनिक सरकारी निवेश की नीति अपनायी, जो गलत साबित हुई और आज उदारीकरण के नाम पर राष्टï्रीयकरण व समाजवाद को त्याग दिया गया है.

प्रारंभ में भारत में केवल दो बड़े उद्योग घराने टाटा और बिड़ला निजी क्षेत्र में हवाई यात्री सेवा टाटा एयरवेज और भारत एयरवेज के नाम से चलाते थे. इनका राष्टï्रीयकरण कर एयर इंडिया बनाया जो भारी घाटा उठाता हुआ सरकार के बजट सपोर्ट से घिसता-पिटता चल रहा है. आज फिर से वापस निजीकरण करके कई छोटे उद्योगपतियों की वायु सेवायें चल रही हैं. ऐसा माना जाता है कि यदि टाटा, बिड़ला की हवाई सेवायें जारी रहती तो आज विश्व स्तर की सशक्त वायुसेवाएं होतीं.

भारत में यदि राष्टï्रीयकरण, सार्वजनिक उद्योग और भारी भ्रष्टïाचार न होता तो भारत की अर्थव्यवस्था अमेरिका की टक्कर की होती. इन दिनों भारत पिछली गलतियों को छोड़ता हुआ तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहा है.

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