bpl1भोपाल, केन्द्रीय विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन से उपजे संकट का प्रभावी समाधान भारतीय जीवन दर्शन और जीवन पद्धति में निहित है.उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन, जीवन शैली, परंपराओं और प्रथाओं में प्रकृति की रक्षा करने का विज्ञान छुपा है.

आवश्यकता दुनिया के सामने इसकी व्याख्या करने की है.उन्होंने कहा कि जब तक भारतीय दर्शन के अनुरूप जीवन शैली नहीं अपनायेंगे तब तक वैश्विक तपन जैसी समस्या का समाधान नहीं मिलेगा.इसलिये प्रकृति की रक्षा करने वाली परंपराओं और संस्कृति को पुनर्जीवित करने की जरूरत है.

श्रीमती स्वराज आज यहाँ विधान सभा भवन के सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी वैश्विक तपन और जलवायु परिवर्तन – समाधान की ओर के समापन सत्र को संबोधित कर रही थीं.सिंहस्थ 2016 के परिप्रेक्ष्य में आयोजित विचार श्रंखला में संगोष्ठी का आयोजन नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा पर्यावरण नियोजन एवं समन्वयक संगठन, नर्मदा समग्र, जन अभियान परिषद और सेकाईडेकान संस्थाओं के सहयोग से किया गया.

श्रीमती स्वराज ने कहा कि विश्व के सामने आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन दो बड़ी चुनौतियाँ हैं.आतंकवाद मनुष्य द्वारा मनुष्य पर हमला है जबकि जलवायु परिवर्तन मनुष्य द्वारा प्रकृति पर किया गया हमला है.इस हमले की शुरूआत 18वी सदी में औद्योगीकरण की प्रक्रिया के साथ शुरू हो गयी थी.कुछ विकसित देशों ने अंधाधुंध विकास करने की हो? में पृथ्वी के लिये जो संकट पैदा किये हैं अब वे उसका समाधान सबसे चाहते हैं. श्रीमती स्वराज ने कहा कि कृत्रिमता के साथ किया गया विकास प्रकृति के लिये एक समस्या बन गया.

विडम्बना यह है कि इसका कृत्रिम समाधान ढूँढा जा रहा है.उन्होंने कहा कि जब तक जीवन शैली में बदलाव नहीं आयेगा तब तक समाधान नहीं मिलेगा.भारत में जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप उपजी प्रकृति की विनाश लीलाओं के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह समस्या भारत के कारण नहीं है लेकिन हम इस वैश्विक समस्या के समाधान का अंग बनना चाहते हैं.उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान पूरी तरह वैज्ञानिक है.उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर कार्बन के्रडिट की बात हो रही है लेकिन ग्रीन क्रेडिट भी मिलना चाहिये.उन्होंने कहा कि लालच छोढऩे, पृथ्वी को नष्ट नहीं होने देने और आवश्यकता के अनुरूप प्रकृति के संसाधनों का उपभोग करने का संकल्प लेने से ही वैश्विक तपन की समस्या का समाधान मिलेगा.

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