jethmalaniकोच्चि,  मशहूर वकील राम जेठमलानी ने शनिवार को कहा कि भारतीय संसद ‘संप्रभु नहीं है’ क्योंकि इसके निर्णयों को अदालत में चुनौती दी जा सकती है. साथ ही उच्च न्यायपालिका में नियुक्ति को लेकर एनजेएसी अधिनियम रद्द करने के लिए उच्चतम न्यायालय की आलोचना करने पर उन्होंने वित्त मंत्री अरूण जेटली को भी आड़े हाथों लिया.

भाजपा के पूर्व सदस्य ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम ‘पुरानी भ्रष्ट सरकार और नयी भ्रष्ट सरकार के बीच पूरी तरह से साठगांठ का नतीजा’ था.

केरल में अभियोजन निदेशालय की तरफ से भारतीय दंड संहिता 1860 की 155वीं वषर्गांठ पर आयोजित कार्यक्रम में जेठमलानी ने जेटली की आलोचना की. जेटली ने एनजेएसी अधिनियम को खत्म करने के उच्चतम न्यायालय के निर्णय को ”गलती” करार दिया था और कहा, ”भारतीय लोकतंत्र गैर निर्वाचित लोगों की क्रूरता का शिकार नहीं हो सकता.” जेठमलानी ने यहां कहा, ”किसी भी नेता और खासकर प्रधानमंत्री से पूछिए. वह आपको कहेंगे कि भारत की संसद संप्रभु है.”

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