दिल्ली में आयोजित भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन में 54 अफ्रीकी देशों की भागीदारी जिनमें 40 राष्टï्राध्यक्ष आये, विश्व में अपने ढंग का और अद्वितीय आयोजन था. किसी विदेशी भूमि पर इतने सारे अफ्रीकी देशों का जमाव पहले कभी नहीं कहीं नहीं हुआ. भारत अपने राजनैतिक, आर्थिक व व्यापारिक संबंधों में अफ्रीका महाद्वीप को अपनी पश्चिमी सीमा मानता है.

वर्तमान समय में अफ्रीकी देशों के विद्यार्थी उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिये भारत ही आते हैं. भारत में हर विषय की उच्च शिक्षा उपलब्ध है. फिर भी अभी कुछ भारतीयों की यह मानसिकता बनी हुई है और अपने बेटे-बेटियों को पढऩे आक्सफोर्ड व कैम्ब्रिज भेजते हैं. उनमें भारत की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज भी हैं जिन्हें इस बात का गर्व है कि उनकी बेटी बांसुरी ने कानून की पढ़ाई आक्सफोर्ड से की. अफ्रीका व दूसरे देशों पर इससे भारत पर हीनता का प्रभाव आता है.

भारत-अफ्रीका शिखर में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि भारत अपने साथी सहयोगी अफ्रीकी देशों के विकास में अपनी भूमिका निभाना चाहता है. भारत की जितनी जनसंख्या है उतनी ही जनसंख्या संयुक्त रूप से अफ्रीकी देशों की है. यदि दोनों को मिला दें तो वह दुनिया की एक तिहायी जनसंख्या हो जाती है.
कभी अफ्रीका को काले लोगों और बहुत ही पिछड़ा होने के कारण ‘डार्क कान्टीनेन्टÓ कहा जाता रहा. भारत की आजादी से सारी दुनिया के उपनिवेशों में स्वाधीनता आन्दोलनों का ज्वार आ गया और एक के बाद एक पराधीन राष्ट्र के स्वाधीन होने का सिलसिला चल पड़ा. अफ्रीका में भी एक नई चेतना आई- रंगभेद के विरुद्ध विश्वव्यापी संघर्ष में भारत सबसे अग्रणी रहा- जिसकी अलख महात्मा गांधी ने उनके दक्षिण अफ्रीका प्रवास के दौरान जगायी थी.

आज यह महसूस होता है कि अफ्रीका के नाईजीरिया व मोजम्बीक में हाइड्रो कार्बन (पेट्रोलियम) का विशाल भंडार है- जो अरब राष्टï्रों के भंडारों से कहीं ज्यादा है, लेकिन उसका पता नहीं था और ये देश जो कभी के सम्पन्न देश हो सकते थे- पर गरीब राष्टï्र बने रहे. भारत इन देशों में हाइड्रो कार्बन का औद्योगिक विकास कर रहा है. भारत की पेट्रो क्रूड की जरूरत का 26 प्रतिशत अफ्रीकी देशों से आता है. आफ्रीका के जाम्बिया में उत्कृष्टï कोटि के तांबा धातु के विशाल भंडार खाने है. भारत उसका विकास व दोहन भी कर रहा है. भारत की अफ्रीका के विकास में अहम भूमिका हो गयी है. उसका एक प्रभाव दिल्ली में हुआ हाल का शिखर सम्मेलन है, जो अब तक का सबसे बड़ा अफ्रीकी देशों का संयुक्त सम्मेलन है. आज अफ्रीका के लोग भारत से ही सबसे ज्यादा प्रेरित और प्रेरणा लेते हैं. कुछ दशकों पहले तक कई अफ्रीकी देशों में ‘जीवन पर्यन्त राष्टï्रपतिÓ हुआ करते थे जो वास्तव में तानाशाही थी लेकिन आज 48 देशों में बहुदलीय प्रणाली का प्रजातंत्र है.

भारत ने अफ्रीकी देशों को 10 बिलियन डालर की आर्थिक मदद दे रहा है और वहां भारत की भूमिका हाल ही में हुए दिल्ली सम्मेलन में ओर सघन हो गयी है. भारत-अफ्रीकी तीसरा शिखर सम्मेलन दोनों के बीच संपर्क व सहयोग का नया सोपान है.

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