प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी इन दिनों 4 अफ्रीकी राष्टï्र मोजम्बिक, दक्षिण अफ्रीका, तन्जानिया और केन्या के दौरे पर है. महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका की पृष्ठभूमि में भारत हमेशा से अफ्रीका के लोगों को अपना निकटतम लगता है. भौगोलिक दृष्टिï से भी यह महाद्वीप भारत के बहुत ही निकट है.

अफ्रीका मेें कई देश तो इतने छोटे है कि भारत के किसी जिले की एक तहसील से भी कम क्षेत्रफल के है. यहां के विकास मेें भारत का सबसे भारत का सबसे बड़ा योगदान हो सकता है. इस दिशा में श्री मोदी की इस यात्रा से काफी पहल की गयी है. श्री मोदी ने अपनी हर विदेश यात्रा का यह स्थाई एजेंडा बना लिया है कि वे इस देश में बसे प्रवासी भारतीयों से एक बड़े समारोह में मुलाकात करते है. इसकी शुरुआत उन्होंने अमेरिका के न्यूयार्क शहर में मेडीसन एस्क्वायर से की थी जो सतत् जारी है. इस दौरे में भी प्रधानमंत्री इसे अंजाम देते जा
रहे है.

उनका मोजम्बिक का दौरा बड़ा सार्थक रहा. वहां खेती योग्य जमीन बहुत बड़ी संख्या में बेकार पड़ी है. इस बार ऐसा करार हुआ है कि भारत यहां पूरी कृषि योग्य जमीन को आबाद कर देगा और वहां की भारी उपज को जो वहां सरप्लस होगी उसे खरीद लेगा. मोजम्बिक की जमीन तुअर दाल की खेती के लिये बहुत उपयुक्त है. वहां आबादी और खपत बहुत कम है. भारत को इस तुअर दाल की भारी जरूरत है.भारत वहां जाकर स्थानीय किसानों को रोजगार देते हुए खेती करेगा और उसके देश की अर्थव्यवस्था में कृषि से आय से भारी संपन्नता आ सकेगी.
श्री मोदी दक्षिण अफ्रीका भी गये जहां महात्मा गांधी द्वारा अंग्रेजी उपनिवेशकाल रंगभेद के विरुद्ध झंडा उठाया गया था और दक्षिण अफ्रीका के लोग आजादी पाने तक उसे उठाये रहे.

श्री नेल्सन मंडेला ने गांधी जी के आदर्शों पर चलते हुए दक्षिण अफ्रीका को रंगभेद और ब्रिटिश गुलामी से मुक्त कर आजादी प्राप्त की थी. वे पहले और अश्वेत राष्टï्रपति बने. भारत ने श्री मंडेला को भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया है. श्री मोदी अपनी इस यात्रा में उन सभी स्थानों पर गये जहां किसी संदर्भ में गांधीजी जुड़े हैं. वे उस रेलवे स्टेशन पर भी गये जहां अश्वेत होने के कारण एक अंग्रेज ने उन्हें ट्रेन से उतार कर उनका सामान बाहर फेंक दिया था.

दक्षिण अफ्रीका के इस स्टेशन पर स्मृति पटल लगा है. श्री मोदी ने यहां से उसकी याद में ट्रेन से यात्रा की. वे फोनिक्स आश्रम भी गये जिसे गांधी जी ने वहां स्थापित किया था. गांधी जी 1921 में वहां से भारत वापस आ गये थे लेकिन उनके पुत्र श्री मणिलाल गांधी व उनका परिवार वहीं बस गया था.

श्री मोदी ने गांधी स्मरण में कहा कि यहां आना उनकी तीर्थयात्रा है. यह यथार्थ है कि गांधीजी भारत से दक्षिण अफ्रीका बेरिस्टर मोहनदास करमचंद गांधी के रूप में वकालत करने गये थे. वहां वे बेरिस्टर से ज्यादा अश्वेतों के विरुद्ध किये जा रहे रंगभेद के विरुद्ध मसीहा के रूप में परिवर्तित हो गए. जब वे भारत लौटे तो बेरिस्टर गांधी से महात्मा गांधी के रूप में आये. वे दक्षिण अफ्रीका में ही महात्मा बने.

श्री मोदी ने अफ्रीका राष्टï्र तंजानिया में आर्थिक भागीदारी में वहां 17 शहरों में पानी की व्यवस्था के लिये 50 करोड़ डालर की आर्थिक सहायता की है. इस दौरे के सभी देशों में भारत ने आर्थिक सहयोग के कई करार किये हैं और भारत-अफ्रीका संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ा है. भारत का पश्चिमी तट और अफ्रीका पूर्वी तट एक दूसरे के आमने-सामने हैं और निकटतम निर्बाध व्यापार का सबसे सुगम समुद्री मार्ग है.

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