भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग का ऐसा करार हुआ है जिसमें एक देश दूसरे देश की रक्षा संरचना व सुविधाओं का उपयोग अपनी सैनिक कार्यवाही के लिये कर सकेगा. जिसमें एक दूसरे के हवाई अड्डेे, बंदरगाह, सैनिक साजो सामान रखने, लाने व ले जाने की व्यवस्था भी शामिल है.

इस निर्णय की पृष्ठभूमि में दोनों देशों के सामने एक सी ऐसी स्थिति आ सकती है जब दोनों सैन्य सहयोग से ही स्थिति पर नियंत्रण रख सकते हंै.

हाल ही में अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में 50 देशों का एक ऐसा शिखर सम्मेलन हुआ जिसका एक मात्र एजेन्डा यह था कि परमाणु हथियारों को किसी भी कीमत पर आतंकवादी संगठनों के हाथों न जाने दिया जाए. यदि ऐसी नौबत आती तो शिखर सम्मेलन के सदस्य देश तत्काल संयुक्त सैनिक कार्यवाही कर उसे ध्वस्त कर देंगेे. इस शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भाग लिया और उसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री श्री नवाज शरीफ को भी भाग लेना था. लेकिन उन्हीं दिनों लाहोर में ईस्टर के रोज ईसाईयों पर आतंकी हमला हो गया और इसे बहाना बनाकर श्री शरीफ ने वाशिंगटन शिखर वार्ता में जाना रद्द कर दिया. श्री शरीफ इस समय ऐसी हालत में है कि वे केवल नाम मात्र के प्रधानमंत्री है. पहले पाकिस्तान में सत्ता के दो केंद्र थे- राजनैतिक सत्ता और सैनिक सत्ता. अब उसमें तीसरा केंद्र बन गया है- वह है आतंकी संगठनों की सत्ता.
श्री शरीफ जानते थे कि यदि उन्होंने वांशिगटन वार्ता में आतंकी संगठनों के विरुद्ध कोई भी समझौता किया तो उन्हें देश में ही आतंकी संगठनों का कोपभाजन बनना पड़ेगा और उन्हें सत्ता से ही हटा दिया जाएगा.

भारत और अमेरिका इस समय आतंकियों के निशाने पर है. अमेरिका व यूरोप के सभी देश इस्लामिक स्टेट आतंकी संगठन के विरुद्ध संघर्षरत् है. फौजी कार्यवाही कर रहे हैं. अलकायदा, जैशे मोहम्मद, लश्करे तैयबा, अफगानिस्तान, पाकिस्तान व भारत में आतंकी हमले कर रहे हैं. पाकिस्तान के पास परमाणु बम है यदि यहां आतंकियों के हाथों में परमाणु हथियार चले गये तो वे भारत के लिये भारी खतरा होगा. यदि अरब राष्टï्रों के परमाणु हथियार इस्लामी स्टेट के हाथ लग गये तो उसका खतरा अमेरिका व यूरोप के देशों पर आयेगा. आतंकी हमले भारत पर तो होते रहते हैं लेकिन यूरोप में पेरिस, ब्रूसेल्स, लंदन व अमेरिका में वल्र्ड ट्रेड सेंटर व पेंटागोन पर भी हो चुके हैं.

साथ ही प्रशांत महासागर में चीन पूरे समुद्री ट्रेड रूट पर कब्जा करना चाहता है. प्रशांत सागर में चीन के अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, फिलीपीन्स, वियतनाम, मलेशिया, इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड की समुद्री सीमा से भागीदारी है और इसके समुद्री व्यापारिक पूरे विश्व के लिये खुले मार्ग हैं.

ऐसी स्थिति एक बार फिर से दुनिया में शीत युद्ध की स्थिति बन गयी है. आतंकियों के विरुद्ध सभी राष्टï्र एकजुट होकर सैनिक कार्यवाही करेंगे इसकी अहम जिम्मेदारी अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन व रूस, यूरोप और प्रशांत व एशिया में भारत पर है. भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग उस दिशा में एक बड़ा सार्थक व चेतावनी भरा कदम है. भारत पाकिस्तान के विरुद्ध सतर्क है. यदि वहां आतंकवादी कभी सत्ता पर काबिज हुए या परमाणु हथियार उनके हाथ लगे तो भारत निश्चित निर्णायक सैनिक कार्यवाही करेगा.

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