प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की इस बार की चौथी अमेरिकी यात्रा में जहां दोनों देशों के बीच के संबंधों में यह बड़ी बात हुई है कि दोनों देश रक्षा व्यापार को बढ़ाने के साथ रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान में भी सहभागी बन गये है.

काफी समय पूर्व राष्टï्रपति निक्सन के भारत विरोधी रुख के कारण भारत का अमेरिका से रक्षा व्यापार बिलकुल ठप्प हो गया था. भारत रक्षा की जरूरत अधिकांश रूप से रूस से लेने लगा था और हवाई सेवा में रूस से फाइटर प्लेन मिग और फ्रान्स से एयर बस लेने लगा था. अमेरिका ने भारत के रूप में बहुत बड़ा ग्राहक व बाजार राजनैतिक द्वेष में खो दिया. अमेरिका का उद्योग जगत इससे बहुत पछताता रहा. अभी हाल में यू.पी.ए. के शासनकाल में कुछ थोड़ी सी शुरूआत के रूप में भारत ने अमेरिका से 6 ट्रांसपोर्ट मिलीट्री प्लेन हरक्युलिक खरीदे.

भारत ब्रिटेन से भी जुगआर फाइटर प्लेन ले था. अब फ्रांस भी अपना फाइटर प्लेन भारत में आकर बनाने को तैयार हो रहा है. सभी रक्षा उद्योग के देश भारत की बड़ी मांग व बाजार को देखते हुए भारत से सघनता से जुडऩे जा रहे है.
श्री मोदी की मेक इन इंडिया नीति का व्यापक असर हुआ है. अब अमेरिका में रक्षा संबंध और गहरा गये है. श्री मोदी ने अमेरिका के उद्योग जगत से कहा है कि भारत सिर्फ एक बड़ा बाजार ही नहीं है. यहां युवा शक्ति, टेलेन्ट और शोध भी है. यह एक खुला हुआ प्रजातंत्रीय राष्टï्र है और एशिया की प्रगति का प्रतीक बन चुका है.

अब अमेरिका इस बात का समर्थन कर रहा है कि भारत को न्यूक्लीयर सप्लायर्स ग्रुप (एन.एस.जी.) का सदस्य बनाया जाये. अभी तक भारत केवल अपने लिये रक्षा मिसाइलें और अंतरिक्ष राकेट ही बना रहा था अब वह इन्हें दूसरे देशों को बेच भी सकता है.

श्री मोदी और श्री बराक ओबामा की व्हाइट हाउस के ओवेल कक्ष में लंबी वार्ता चली. परमाणु ऊर्जा के विकास के लिए यूपीए के शासनकाल में अमेरिका से करार हो चुके हैं. श्री मोदी की इस यात्रा में यह करार हुआ है कि अमेरिका भारत में 6 न्यूक्यिलर पावर प्लांट लगायेगा. भारत के कुड़ाकुड़म में रूस परमाणु ऊर्जा प्लांट लगा ही चुका है. दूसरे देश भी भारत में परमाणु ऊर्जा के विकास के साथ उत्पादन उद्योग को भी भारत में लगाने के लिए आ रहे हैं. इस समय यह स्थिति बन चुकी है कि भारत दुनिया का औद्योगिक निवेश का हब बन चुका है. जरूरत इस बात की है कि हमारे देश में इनके लिये पर्याप्त संरचना, भूमि, ऊर्जा उपलब्ध रहे.

श्री मोदी के इस दौरे में अमेरिका ने भारत को वे 200 मूर्तियां भी लौटा दीं जो कभी तस्कर ले गये थे. आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में भारत और अमेरिका आयात-निर्यात बैंक स्थापित करेंगे. इनमें डालर-रुपया का विनिमय मूल्य और व्यापार में काफी सुगम हो जायेगा. प्रशांत महासागर के उत्तर व दक्षिण चीन पगारों में चीन की बढ़ती हुई दखलंदाजी का मुकाबला भी दोनों देश मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रशांत महासागर पूरी स्वतंत्रता व निर्बाध रूप में व्यापार व आवागमन के लिए सारे संसार को उपलब्ध रहे. मिसाइल के क्षेत्र में भारत एन.एस.जी. के अलावा एम.टी.सी.आर (मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रीजीम) में भी शामिल हो गया है. भारत में मिसाइल युग का प्रारंभ प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने किया था और श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भारत का मिसाइल जगत में प्रवेश
कराया था.