भारत अभी तक इस रूप में जाना जाता रहा कि हथियारों व अन्य रक्षा उपक्रमों फाइटर प्लेन, टैंक युद्धपोत, तोपें आदि का दुनिया में सबसे बड़ा आयात करने वाला ग्राहक है. आजादी के बाद भारत को कहीं से कोई बड़ा खतरा नहीं था.

पाकिस्तान की ओर से चला आ रहा तनाव हमारी बराबरी का नहीं था. ऐसे में प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने यह नीति अपनायी कि विदेशी मामलों में विश्व शांति, पंचशील आदि जैसी नीति अपनाई जाए. साथ ही देश के आर्थिक विकास के लिये सरकारी उपक्रमों से नये-नये उद्योग लगाए जाएं.

चीन एकाएक पंचशील व भारत-चीनी भाई-भाई की नीति से पलट गया और उसके पड़ोसी राष्टï्रों- भारत, म्यानमार, वियतनाम, रूस से सीमा विवाद हो गए. अब उसने उत्तर व दक्षिण चीन सागरों की 12 नोटीकल मील तक अन्तरराषट्रीय समुद्री सीमा का उल्लंघन कर पूरे प्रशांत महासागर में अपना प्रभुुत्व जमाना चाहता है. यह वैसा ही लग रहा है जैसा कि कभी जर्मनी का हिटलर पूरे यूरोप पर उसका प्रभुत्व चाहता था और द्वितीय विश्वयुद्ध भड़क गया जिसमें जर्मनी पराजित और गुलाम हो गया.

प्रशांत महासागर में चीन अपने कृत्रिम द्वीप बनाकर उन्हें अपनी सीमा बता रहा है जिसे विश्व समुदाय मान्यता नहीं दे रहा है. चीन को चुनौती प्रशांत क्षेत्र में- जापान, दक्षिण कोरिया, फिलीपीन्स, वियतनाम व अमेरिका व भारत से मिल रही है. भौगोलिक दृष्टिï से इसका सर्वाधिक उत्तरदायित्व भारत व जापान पर है. अमेरिका भी यह मानता है कि चीन की समुद्री विस्तारवाद की नीति को प्रशांत क्षेत्र में प्रभावी रूप से भारत व जापान ही रोक सकते हैं.

सन् 1962 में चीन के हमले के बाद भारत ने अपनी रक्षा नीति में व्यापक परिवर्तन किया और आज वह अंतरिक्ष व मिसाइल टेक्नोलॉजी में इतना विकसित हो गया कि वह विश्व स्तर पर है. इन दोनों क्षेत्रों में भारत ने अपने ही बलबूते पर महारत हासिल की है. आधुनिक वैज्ञानिक व तकनीकी प्रगति में भी भारत वियतनाम में समुद्र तटों पर ‘बाम्बे हाईÓ प्रोजेक्ट की तरह तेल की खोज व खनन में लगा है.

चीन इसका विरोध कर रहा है तब भी भारत ने उसकी परवाह नहीं की और उसके विरोध की उपेक्षा करते हुए वहां तेल खनन का काम जारी रखे हुए हैं. यदि चीन का यही रवैया रहा तो प्रशांत महासागर में युद्ध के तनाव की स्थिति जो निर्मित हो चुकी है आगे चलकर युद्ध में परिवर्तित हो सकता है. ऐसी संभावनाओं से भारत और अमेरिका और जापान अपनी जिम्मेवारी निभाने आगे आयेंगे कि प्रशांत महासागर शांत क्षेत्र रहे और विश्व व्यापार के लिये सभी के लिये समुद्री जारी उपलब्ध भी रहे.

अब भारत सैन्य क्षेत्र में वियतनाम व इंडोनेशिया में भारत में निर्मित मिसाइलें और सैनिक उपकरण व आयुध सामग्री निर्यात करेगा और उन्हें रक्षा सहयोग देगा. भारत से मिसाइल ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और चिली जैसे देश में लेने चाहते हैं. भारत जो कभी हथियार और बोफोर्स तोपें आयात करता था, दूसरे राष्टï्रों को मिसाइलें और सैन्य उपकरण निर्यात करेगा.

भारत को विश्व के मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल सिस्टम व न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप की सदस्यता मिलने से चीन और पाकिस्तान काफी परेशानी महसूस कर रहे हैं. इस्लामिक राष्टï्र अफगानिस्तान व ईरान भी भारत के काफी नजदीक आ गये हैं. एशिया में भारत और जापान की प्रशांत महासागर में जबरदस्त भूमिका होते जा रही है. भारत ब्रह्मïोस मिसाइल बनाकर विश्व सैन्य शक्ति बन गया है. रक्षा के क्षेत्र में इसे बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.

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