sanchiसांची,  मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के सांची में आयोजित दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव के समापन समारोह के मौके पर श्रीलंका के उच्चायुक्त ईशाला वीराकॉन ने भारत और श्रीलंका को एक ही माता की संतान बताया।

कार्यक्रम के दूसरे दिन रविवार को प्रदेश के गृह मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री बाबूलाल गौर भी वहां मौजूद थे। उन्होंने महात्मा बुद्ध के शिष्य महामोदग्लायन एवं सारिपुत्र की पवित्र अस्थियों के दर्शन कर देश-दुनिया में शांति, प्रेम और भाईचारे की कामना की।

इस अवसर पर स्तूप परिसर में आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में श्री गौर ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने दुनिया को प्रेम, शांति और अहिंसा का मार्ग दिखाया है। उन्होंने दुनिया को तीन महामंत्र, बुद्ध शरणम गच्छामि, संघं शरणम गच्छामि और धम्मं शरण दिए हैं।

श्री गौर ने सांची में मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि सन 27 दिसम्बर 1947 में भोपाल के नवाब ने मंदिर निर्माण के लिए ढाई एकड़ जमीन और 25 हजार रूपए दिए। यह हमारे देश की सहिष्णुता, भाईचारे, प्रेम और सर्वधर्म समभाव का महान उदाहरण है।

कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए श्रीलंका के उच्चायुक्त श्री वीराकॉन ने कहा कि भारत ने श्रीलंका को जो महान उपहार दिया है, वह बौद्ध धर्म है।

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