भारत ने रूस और यूरोप तक सड़क मार्ग का यातायात गलियारा के लिए एक अन्तरराष्ट्रीय समझौता किया था जिस पर अगले माह से काम शुरू हो जाएगा.

भारत इसी तरह एक और अन्तरराष्ट्रीय सड़क यातायात के लिए पूर्व में म्यानमार-थाईलैंड, कम्बोडिया, लाओस होता हुआ वियतनाम तक जाने वाले आर्थिक गलियारे के लिए वार्ता चला रहा है.

इसे इन्टरनेशनल नार्थ साऊथ ट्रान्सपोर्ट कोरीडोर (आई.एन.ए.टी.सी.) नाम दिया गया है. इस गलियारे से पहली खेप भारत की ओर से रूस को मिलेगी.

यह गलियारा मुम्बई को रूस के महानगर सेन्ट पीटर्सबर्ग से जोड़ता है. विगत 17 सालों से इस पर काम चल रहा है. इस गलियारे से हर साल 3 करोड़ टन तक वस्तुओं की ढुलाई होने का अनुमान है.

अभी कुछ दिन पहले ही भारत ने ईरान के चौबहार बन्दरगाह के रास्ते अफगानिस्तान होता हुआ अरब के कई राष्ट्रों से सड़क यातायात का गलियारा कायम कर लिया है. भारत जो अभी तक पाकिस्तान होता हुआ अफगानिस्तान से व्यापार करता था अब वह सीधा पश्चिमी तट के मुम्बई, कान्दला बन्दरगाहों से चौबहार के रास्ते सीधा होने लगा है.

भारत- रूस- यूरोप अन्तरराष्ट्रीय उत्तर- दक्षिण परिवहन गलियारे का औपचारिक उद्घाटन आगामी जनवरी माह के मध्य तक होगा. इस गलियारे के लिये भारत-ईरान व रूस ने सितंबर 2000 में इसके समझौते पर हस्ताक्षर किये थे.

यह गलियारा हिन्द महासागर और फारस की खाड़ी को ईरान और सेन्ट पीटर्सबर्ग के रास्ते केस्पीयन सागर तक जोड़ता है. इस गलियारे से न केवल भारत से ईरान के रास्ते रूस और यूरोप तक सामान की ढुलाई की लागत और समय कम होगा बल्कि भारत को यूरोप-एशियाई क्षेत्र से संपर्क का नया एक बहुत ही सुदृढ़ विकल्प भी मिल रहा है.

भारत- ईरान-अफगानिस्तान के त्रिदेशीय आर्थिक गलियारे का उद्घाटन हाल ही में 3 दिसंबर 2017 को हुआ और अगले माह जनवरी में भारत-रूस-यूरोप परिवहन गलियारे का उद्घाटन आर्थिक क्षेत्र में जबर्दस्त प्रगति है.

इन दोनों गलियारों से ढुलाई लागत और लंबे समय को काफी घटाकर छोटा कर दिया गया है. ये दोनों गलियारे भारत के लिए अथाह अवसरों को खोल रहे हैं.इन गलियारों में रेल मार्ग शामिल किये जायेंगे जिससे माल की ढुलाई सड़क, रेल व समुद्र मार्गों से जुड़ती हुई तीव्र गति से अति सुगम होने जा रही है.

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