washington1नयी दिल्ली,   विदेश मंत्रालय ने आज स्पष्ट किया कि अमेरिकी सीनेट में एक महत्वपूर्ण संशोधन के पारित नहीं होने के बावजूद भारत के अमेरिका का प्रमुख रक्षा भागीदार बनने में कोई कठिनाई नहीं आयेगी। अमेरिकी सीनेट में कल निर्यात नियंत्रण अधिनियम में एक महत्वपूर्ण संशोधन के पारित नहीं होने से भारत उसका वैश्विक रणनीतिक एवं रक्षा भागीदार बनने में रुकावट की खबर के बाद विदेश मंत्रालय की ओर से यह स्पष्टीकरण आया है।

सरकार के सूत्रों ने यूनीवार्ता को बताया कि अमेरिकी सीनेट के ताजा संशोधन से हमारे प्रमुख रक्षा भागीदार बनने के दर्जे पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सात जून को अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान में भारत को अपना प्रमुख रक्षा भागीदार बताया था। इसमें दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधी व्यापार एवं तकनीकी हस्तांतरण का समर्थन किया गया था।

उन्होंने कहा कि संयुक्त बयान के अनुसार, अमेरिका भारत को एक प्रमुख रक्षा साझीदार मानता है। इसमें कहा गया कि अमेरिका अपने करीबी सहयोगी देशों और साझेदारों के समान स्तर पर भारत के साथ प्रौद्योगिकी साझेदारी की दिशा में काम करता रहेगा। दोनों पक्षों ने एक रोडमैप को अंतिम रूप दिया जिसके तहत भारत अमेरिका की रक्षा और दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकी तक बेहतर और लाइसेंस मुक्त पहुंच बना सकता है।

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