विश्व युवा कौशल दिवस- 15 जुलाई को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश में ‘स्किल इंडिया’ का शुभारम्भ किया. इस कार्यक्रम में केन्द्र व राज्य सरकारों के 11 मंत्रालयों- रक्षा, रेल, प्रवासी भारतीय, भारी उद्योग, स्वास्थ्य, रसायन-उर्वरक, इस्पात, कोयला, विद्युत, ऊर्जा व सामाजिक न्याय की सक्रिय व महत्वपूर्ण भागीदारी होगी. इन कार्यक्रमों में 24 लाख युवाओं को प्रशिक्षण व उद्यमी बनने का मौका मिलेगा. श्री मोदी ने कहा कि हम नहीं चाहते कि हर कोई पढऩे के बाद नौकरी खोजे. हम चाहते हैं कि लोग कौशल सीखें. देश में 10 करोड़ से ज्यादा युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने की जरूरत है.

देश की पहली प्राथमिकता युवाओं के लिये नौकरी अवसर पैदा करना है. फिलहाल देश में मौजूदा 30 करोड़ लोगों की वर्क फोर्स को स्किल ट्रेनिंग होगी. पांच साल में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और ऋण योजना के तहत 34 लाख प्रशिक्षित बेरोजगारों को कर्ज दिया जायेगा. जैसे चीन ने अपनी पहचान मैन्यूफेक्चरिंग हब के रूप में बनायी है. भारत को मानव संसाधन हब के रूप में विकसित होना है. प्रशिक्षित होने से आमदनी के साथ-साथ युवाओं में आत्मविश्वास आयेगा.
स्किल इंडिया के अंर्तगत 4 अन्य योजनायें राष्ट्रीय दक्षता विकास मिशन, उद्यमिता, प्रधानमंत्री कौशल विकास और प्रशिक्षित कर्ज योजना. इस कार्यक्रम की सहभागिता में कई कम्पनियां, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों से निकले युवाओं के लिये दस हजार से अधिक नौकरियों के अवसर देगी. हर युवा को कम से कम 8 हजार रुपयों का रोजगार दिया जायेगा. इस समय देश में 3.5 प्रतिशत लोग ही ऐसे हैं जो किसी ट्रेड में पूरी तरह कुशल कारीगर हैं. दुनिया में कुशल प्रशिक्षित लोगों के लिये नौकरियों का बहुत बड़ा बाजार है. ऐसे में भारत के प्रशिक्षित लोगों के लिये विदेशों में भी भरपूर अवसर मिलेंगे. इनमें 4-5 करोड़ कुशल कारीगरों को ससम्मान बुलाकर काम दिया जायेगा. भारत युवा देश है और हमें इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए.

ऐसी उत्साहपूर्ण योजनाओं के शुभारम्भ से कुछ दिनों पूर्व ही मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में व्यापमं के ही तत्वावधान में चपरासी (भृत्य) व चौकीदारों की भर्ती के लिए परीक्षा हुई. इसमें न्यूनतम शिक्षा स्तर 8वीं (मिडिल) पास था और इसमें अधिकांश लोग ऐसे थे एम.ए.-बी.ए. के अलावा बी.ई. पास इंजीनियर और मेडिकल डाक्टर भी थे. कुछ शिक्षा बी.ए.- एम.ए.- बी.एस.सी.- एम.एस.सी.- बी.कॉम.-एम.कॉम. आदि सामान्य ज्ञान की शिक्षायें हैं जिसके लोग नौकरियों में ही जाते रहते थे और यहां जगह खाली नहीं है (नो वेकेन्सी) की हालत में बेकार घूमते और शहरों व सड़कों में चोरी, लूटपाट, पर्स-चैन खींचने के अपराध में लग जाते हैं. लेकिन बात बढ़कर यहां तक आ गयी है कि इंजीनियर और डाक्टर भी चपरासी व चौकीदारी की नौकरियों के लिये उनकी योग्यता के बाद भी भर्ती के लिये उसकी परीक्षा में बैठ रहे हैं. प्रशिक्षित व्यक्ति के साथ इन्साफ व अवसर तभी होगा जब उसे उसकी योग्यता के अनुसार काम मिले. इंजीनियर या डाक्टर को किसी दफ्तर में क्लर्क, चपरासी या चौकीदार बना भी दिया जाये तो न ही योग्यता का उपयोग हुआ और न ही वह
संतुष्टï होगा.

प्रशिक्षण के साथ-साथ यह भी उतना जरूरी है कि उसे उसकी योग्यता के अनुसार काम मिले. युवा इंजीनियर बिल्डर्स के यहां टाइम कीपर- ओवर सीयर की तरह काम कर रहे हैं. डाक्टर बेकार घूम रहे हैं. यह कहना भी कि वे गांवों में जायें- महज कुछ कहने के लिये ही कहना होगा. एक गांव की आबादी में प्रेक्टिस का क्या अवसर है. वहां भी नीम-हकीम झोलाछाप डाक्टर छाये हुए हैं.
अवसर का अर्थ सिर्फ नौकरी ही नहीं हो सकता, लेकिन अवसर का अर्थ सिर्फ ‘कर्जÓ देना भी नहीं हो सकता. सबकी प्रतिभा एक जैसी नहीं होती.

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