जापान के प्रधानमंत्री श्री शिंजो आबे की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच सहयोग के नये कीर्तिमान स्थापित हो गये हैं. इसमें परमाणु ऊर्जा के मामले में हुआ समझौता सबसे अहम है. भारत को इस समय अपने विकास के लिये परमाणु ऊर्जा की सबसे ज्यादा जरूरत है. साथ ही उसे कोयला से चलने वाले थर्मल प्लांटों को भी शनै: शनै: विकल्प मिलने पर बंद करते जाना है. प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के शासनकाल में मुंबई में आणुणिक ऊर्जा का प्रारंभ वैज्ञानिक डाक्टर होमी भाभा के नेतृत्व में हो
चुका है.

आज भारत में कई परमाणु संयंत्र उत्तरप्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान आदि राज्यों में काम कर रहे है. लेकिन हमारी जरूरतें इससे कही बहुत ज्यादा है. इस क्षेत्र में कांग्रेस नेतृत्व की यू.पी.ए. सरकार के प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह अमेरिका, रूस, कनाडा, आस्ट्रेलिया आदि से परमाणु ऊर्जा संयंत्रों व पूरे नियम आपूर्ति पर समझौते कर चुके हैं. अब इन सबसे इस समय जापान में हुआ परमाणुऊर्जा समझौता सबसे अहम है. इस समय जापान पूरे विश्व में परमाणु तकनीकी में सबसे आगे है. उसकी तोशीबा कंपनी को शीर्ष स्थान प्राप्त है. रूस को छोड़कर सारे विश्व के परमाणु संयंत्रों में जापानी कंपनियों के ही पार्ट्स लगते है जो 1000 मेगावाट से ऊपर होते है.

भारत को जापान से अत्यन्त आधुनिक नवयुग की तकनीक के 1000 मेगावाट से ज्यादा क्षमता के परमाणु संयंत्र मिल रहे हैं. जिनमें पूरी सुरक्षा तकनीक भी होगी. भारत 6 परमाणु संयंत्र जापान से अगले साल 2016 के मार्च तक खरीद रहा है. जो 1000 मेगावाट से अधिक क्षमता के होंगे. इसके अलावा औद्योगिक विनिर्माण के क्षेत्र में अनेकों कंपनियां भारत मेें आकर वस्तुओं का निर्माण ‘मेक इन इंडियाÓ की नीति के तहत करेगी.

श्री आबे की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार क्षेत्र का निर्माण हो चुका है. भारत की न सिर्फ परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी बल्कि अनेकों नामी गिरामी, जापानी कम्पनियां यहां स्थापित होंगी और रोजगार के अवसरों में भारी वृद्धि होगी.

अहमदाबाद-मुम्बई को जोडऩे के लिये बुलेट ट्रेन पर 12 बिलियन डालर का समझौता हो गया है. प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा है कि भारत के विकास में जापान का सहयोग सबसे अहम् है. रक्षा के क्षेत्र में जापान भारत को अति आधुनिक तकनीक उपलब्ध करा रहा है. यह भी तय हुआ है कि बंगाल की खाड़ी में नियमित रूप से जो भारत व अमेरिका नौसेनाएं संयुक्त युद्घक सैनिक अभ्यास करती हैं अब उसमें जापान की भी नौसेना भी नियमित रूप से हमेशा अभ्यास में शामिल हुआ करेगी. दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों में यह सहमति बनी है कि चीन को प्रशांत महासागर पर कब्जा नहीं करने दिया जायेगा. उसके समुद्री मार्ग अन्तरराष्टï्रीय कानूनों के तहत सबके लिए खुले रहेंगे. भारत-जापान सहयोग चीन को प्रशांत महासागर में उसकी समुद्री सीमा तक सीमित रखेगा.

श्री आबे की वाराणसी यात्रा को अद्भुत कहा जा सकता है. यहां उन्होंने श्री मोदी के साथ गंगा तट पर खड़े होकर हिंदू विधि विधान से गंगा की आरती उतारी. देश में गंगा नदी की सफाई का अभियान चल रहा है. इसमें भी जापानी सहयोग भारत को मिल रहा है. श्री आबे की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच न सिर्फ व्यापारिक बल्कि आत्मीयता के भी संबंध और गहरे हो गये हैं. भारत के विकास में जापान की अहम् भूमिका होगी.

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