अमेरिका व यूरोपीय देशों में पुन: आई मंदी और चीन द्वारा आक्रमक व्यापार से भारत के निर्यात व्यापार पर गहरा संकट छा गया है. इस आघात से बड़ा आघात हमारी वित्तीय नीतियों के कारण यह है कि भारत में निर्यात पूंजी पर ब्याज दर विश्व में सबसे ज्यादा है. एक साल में यह 75 प्रतिशत बढ़ा दी गई है. गत वर्ष यह 7.10 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 11.75 प्रतिशत कर दी गई है. चीन में निर्यात पंूजी पर ब्याज दर 6.56 प्रतिशत यूरोप में एक प्रतिशत व अमेरिका में 0.5 प्रतिशत है. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनीजेशन के अध्यक्ष श्री रामू देवड़ा ने कहा है कि अमेरिका व यूरोप की मंदी से आगे भी निर्यात में और ज्यादा गिरावट आयेगी. निर्यात पूंजी ब्याज दरों के कारण महंगी होने से बहुत ही विपरीत प्रभाव पड़ रहा है. इसमें तत्काल प्रभाव से छोटे व मध्यम निर्यात यूनिटों के लिये 3 प्रतिशत व बड़े कारपोरेट सेक्टर में 2 प्रतिशत की कमी की जानी चाहिये.

इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के श्री राजेश शाह का कहना है कि अमेरिकी मंदी में चीन अपना निर्यात व्यापार निर्यात पूंजी पर सस्ती ब्याज दर व कीमतें कम करके अपने निर्यात को भारत से सस्ता रख कर हमें बड़ी चुनौती दे रहा है. इस कारण भारत के निर्यातक अमेरिका व यूरोप के अलावा नये बाजारों में भी चीन में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पायेंगे.

ऐसे में लेटिन अमेरिकी देशों में नये बाजार तलाशना भी महंगा पड़ेगा. कानफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (सी.आई.आई.) के श्री संजय बुधिया ने भी यह आशंका व्यक्त की है कि भारत का निर्यात काफी नीचे आ रहा है.

बाजार संकुचित हो गये हैं और नये बाजार बनाने में समय लगेगा और यह मुश्किल भी दिख रहा है. जेम (रत्न) और ज्वेलरी निर्यात परिषद के श्री पंकज पारिख ने भी कहा है कि अमेरिका व यूरोप की मंदी से इनके निर्यात में भारी कमी आने वाली है. सोने के भावों में तेजी से उतार चढ़ाव में भाव भी अस्थिर बने हुये हैं. श्री रामू देवड़ा के अनुसार डालर के मुकाबले रुपये के अवमूल्यन से निर्यातकों को लाभ नहीं मिलेगा. इसमें तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं.

केंद्रीय वाणिज्य सचिव श्री राहुल खुल्लर ने निर्यातकों से कहा है कि वे निर्यात के मामले में यह महसूस न करे कि अमेरिका व यूरोप व जापान में ही दुनिया खत्म हो जाती है. हमें इन मुल्कों के अलावा भी अन्य देशों में निर्यात व्यापार को जमाना होगा. इस पर बड़ी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये निर्यातकों ने कहा न सिर्फ चीन के मुकाबले बल्कि सारी दुनिया में हमारे यहां निर्यात पूंजी पर सर्वाधिक ब्याज रखकर और चीन से सस्ते माल मिलने पर नया बाजार तलाशना असंभव कर दिया गया है.

भारत में महंगाई कम करने के नाम पर रिजर्व बैंक ने बैंक दरों को बढ़ाते हुये उसे व्यापार जगत के लिये इतना महंगा कर दिया है कि उसे उससे आर्थिक विकास ही अवरुद्घ हो गया है.

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