एलओसी पर तनाव बरकरार

इस्लामाबाद, 27 जनवरी. नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम के उल्लंघन के कारण उपजे तनाव की पृष्ठभूमि में भारत और पाकिस्तान के जल सचिवों के बीच इस्लामाबाद में 28-29 जनवरी को प्रस्तावित वार्ता स्थगित कर दी गई है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा बातचीत स्थगित कर दी गई है। बातचीत की अगली तिथि के बारे में फैसला अभी होना है। नाम नहीं जाहिर करने की शर्त यह जानकारी देने वाले इस अधिकारी ने वार्ता स्थगित होने की वजह नहीं बताईं। दोनों देश तुलबुल नौवहन परियोजना-वुल्लर बैराज मुद्दे पर चर्चा करने वाले थे। पाकिस्तान से कहा गया है कि वार्ता का स्थगित होना सीधे तौर पर हाल ही में दोनों देशों के बीच उपजे तनाव से जुड़ा है।
उधर, नयी दिल्ली से मिली खबरों में कहा गया है कि वार्ता के स्थगित किए जाने का कदम जल संसाधन सचिव डी.वी. सिंह की सेवानिवृत्त से जुड़ा होना लगता है।

नियंत्रण रेखा पर तनाव के बाद दोनों देशों के बीच यह दूसरी उच्च स्तरीय वार्ता स्थगित हुई है। इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्री मखदूम अमीन फहीम का भारत दौरा रद्द हो गया था। वह आगरा में एक कारोबारी बैठक में शामिल होने वाले थे। जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन कई बार हुआ। इसें दो भारतीय सैनिक मारे गए एवं उनके शरीर बुरी तरह से क्षत विक्षत कर दिए गए। पाकिस्तान का कहना है कि इस संघर्ष में उसके तीन सैनिकों की हत्या कर दी गयी। दोनों देशों के बीच साल 2003 में संघर्ष विराम अमल में आया था।

नियंत्रण रेखा पर आवाजाही कल से संभव

भारत-पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर से सटे नियंत्रण रेखा (एलओसी) से होने वाले व्यापार और आवाजाही सोमवार को दोबारा शुरू होने की सम्भावना है। यह जानकारी एक अधिकारिक सूत्र ने रविवार को दी। एक नागरिक प्रशासन अधिकारी के मुताबिक दोनों देशों के बीच तनाव कम हो गया है और नियंत्रण रेखा से दोनों देशों के बीच व्यापार और आवाजाही सोमवार से दोबारा शुरू होने की सम्भावना है। यह आकस्मिक मोड़ उस वक्त सामने आया जब शनिवार को भारत के 64वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत और पाकिस्तान की सेना ने सद्भावना जाहिर करते हुए नियंत्रण रेखा पर एक दूसरे को मिठाईयों का आदान-प्रदान किया।

आठ जनवरी को दो भारतीय जवानों की पाकिस्तानी सेना द्वारा निर्मम हत्या किए जाने के बाद नियंत्रण रेखा से दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार और आवाजाही को बंद कर दिया गया था। इस घटना के बाद पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पूंछ जिले में स्थित चक्कां-दा-बाग नियंत्रण रेखा पर लगे दरवाजे को खोलने से इनकार कर दिया था। जबकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के साथ पहले की तरह किसी भी तरह के व्यापारिक रिश्ते बरकरार न रखने की घोषणा की थी।

तनाव के माहौल में पाक से मिठाई का लेन-देन

Indian _Pakजम्मू। दो भारतीय जवानों के सिर काटे जाने की घटना के बाद से दोनों देशों के संबंधों में आए तनाव के बीच गणतंत्र दिवस के मौके पर पाकिस्तान की सेना की तरफ से भारतीय जवानों को मिठाई का तोहफा दिया गया।

खास मौकों पर मिठाई और तोहफों का लेन-देन दोनों देशों की सेनाओं व अर्द्धसैनिक बलों के बीच की नियमित प्रक्रिया है लेकिन इस माहौल में पाकिस्तानी सेना के कदम से लोगों को थोड़ा अचरज हुआ है। दोनों देशों के बीच चलने वाली बस की सेवा और व्यापार फिलहाल रुका हुआ है। सेना के आधिकारिक सूत्र के अनुसार मिठाई का यह लेन-देन नियंत्रण रेखा पर पुंछ सेक्टर के चकन दा बाग नामक स्थान पर हुआ। इस दौरान भारत के सीमा सुरक्षा बल और पाकिस्तान के रेंजर्स की ओर से भी मिठाई का आदान-प्रदान हुआ।

कारगिर लड़ाई में मुजाहिदीन नहीं, पाक सैनिक थे शामिल

नई दिल्ली. कारगिल लडा़ई में पाकिस्तान के दावों को बेनकाब करते हुए इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के पूर्व अधिकारी शाहिद अजीज ने कहा है कि 1999 की इस लड़ाई में मुजाहिदी शामिल नहीं थे। उन्होंने इस युद्ध को पाकिस्तान की करतूत बताया है।

अजीज ने एक लेख में कहा,’कारगिल की तरह हमने जो भी निरर्थक लड़ाई लड़ी है, उससे हमने कोई सबक नहीं सीखा है। हम सबक सीखने से इंकार करते आ रहे हैं। वास्तविकता यह है कि हमारे गलत कामों की कीमत हमारे बच्चे अपने खून से चूका रहे हैं। कारगिल की लड़ाई के दौरान आईएसआई की एनालिसिस विंग के प्रमुख रहे अजीज ने पाकिस्तान के एक दैनिक समाचार पत्र में लिखा है,’कारगिल की लड़ाई में कोई मुजाहिदीन नहीं थे। वायरलेस पर केवल झूठे संदेश भेजे गए थे। इससे किसी को बेवकूफ नहीं बनाया जा सका। हमारे सैनिकों को हथियार एवं गोलाबारूद के साथ खंदकों में बिठाया गया था। अजीज ने पूर्व जनरल परवेज मुशर्रफ पर भारत के खिलाफ युद्ध छेडऩे का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुशर्रफ और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को इस युद्ध के बारे में पता था।

मुशर्रफ नक्शों के साथ नवाज शरीफ से मिलते थे। उन्होंने कहा कि कारगिल की लडा़ई बिना किसी योजना के लड़ी गई। पाकिस्तानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय और वास्तविक हालात को समझे बिना कारगिल में लड़ाई शुरू की। पाकिस्तानी सेना का मकसद सियाचीन पर कब्जा करना था। हालांकि पाकिस्तानी सेना को यह उम्मीद नहीं थी कि भारत इस तीव्रता के साथ जवाबी कार्रवाई करेगा।

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