भारत और पाकिस्तान के बीच विदेश सचिव की वार्ता दिल्ली में हो गयी- यही एक संतोषप्रद बात हुई है. इसके पहले दो बार ऐसे प्रयास हुए थे. एक बार भारत ने वार्ता इसलिए रद्द कर दी थी कि वार्ता से ठीक पहले भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त श्री बासित ने अलगाववादी कश्मीरी नेताओं से वार्ता की थी.

भारत दोनों देशों के बीच राजनैतिक व कूटनीतिक मामलों को दो पक्षों के बीच सीधी वार्ता मानता है और उसे कोई तीसरा पक्ष स्वीकार नहीं है. अंतरराष्टï्रीय स्तर पर भी यही स्थिति बनी हुई है. सभी देश पाकिस्तान से यह कह चुके हैं कि वे भारत और पाकिस्तान के बीच तीसरे राष्टï्र की भागीदारी या मध्यस्थता की भूमिका में नहीं आयेंगे. यह इन दोनों देशों का द्विपक्षीय मामला है.

दूसरी बार वार्ता को रद्द तो नहीं किया गया, लेकिन यह सहमति बनी थी कि वार्ता को फिलहाल आगे किसी तारीख के लिये टाल दिया जाए. इसकी वजह यह थी कि वार्ता से कुछ दिन पूर्व ही भारतीय वायुसेना के बेस एयर स्टेशन पठानकोट पर पाकिस्तान के आतंकियों ने हमला कर दिया था. इस वार्ता का टल जाना दुखद इसलिए रहा कि इसकी भूमिका में एक बहुत ही अच्छी स्थिति यह निर्मित हो गयी थी कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी अफगानिस्तान से लौटते समय एकाएक बन गये कार्यक्रम में दिल्ली लौटने से पहले श्री मोदी कुछ घंटों के लिये लाहौर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के आग्रह पर उनसे मिलने उनके निजी आवास गये जहां उनकी भांजी की शादी की एक रस्म हो रही थी.

श्री नवाज ने श्री मोदी को इसमें बतौैर मेहमान बुलाया था और रवानगी पर उन्हें छोडऩे हवाई अड्डे तक गये थे. इस तरह यह वार्ता राजनैतिक के साथ कुछ निजी भी हो गयी थी. इससे कुछ समय पहले भारत की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज भी लाहौर गयी थीं और शासकीय कार्य के अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री श्री नवाज शरीफ की मां से भी मिली थीं.

इस पृष्ठभूमि के संदर्भ में जो विदेश सचिव स्तर की वार्ता होने जा रही थी उससे काफी आशाएं थीं, लेकिन पाकिस्तान की फौज और आतंकी हर समय ऐसे वातावरण को बिगाड़ते ही हैं. उन्होंने उसी के लिये पठानकोट हवाई बेस स्टेशन पर हमला कर दिया और जो वार्ता आगे बढ़ायी गयी थी वही अब यह दिल्ली में हुई है.
भारत की तरफ से हमेशा की तरह पाकिस्तान से यही कहना रहा कि अगर संबंध सुधारना हो तो सीमा पर ऐसे आतंकी हमले और पाकिस्तान में उन्हें शरण व प्रशिक्षण देना पहले बंद
करना होगा.

इस वार्ता में भारत के विदेश सचिव श्री जयशंकर ने पाकिस्तान के विदेश सचिव श्री एजाज अहमद चौधरी से यही कहा कि आतंक रुकता है तभी पाकिस्तान से वार्ता सार्थक होगी. पाकिस्तान ने तथाकथित ‘राÓ जासूस के इल्जाम पर जिस भारतीय श्री यादव को ब्लूचिस्तान में गिरफ्तार किया है, उसके संबंध में पाकिस्तान से यही कहा गया कि उसे इस्लामाबाद स्थित भारतीय राजदूत से मिलने दिया जाए.

भारत यह मानता है कि श्री कुलभूषण को कहीं से अगवा कर पाकिस्तान लाया गया है ताकि भारत पर आतंकी जवाब में जासूसी का इल्जाम लगाया जा सके. दोनों विदेश सचिव ने वार्ता को आगे जारी रखने का तय किया है. दोनों देशों के बीच बनते माहौल को पाकिस्तानी फौज व आतंकी हमेशा से सेबोटाज करते हैं इसलिए इस बार भी पाकिस्तान से यह फिर कहा गया है कि यदि कुछ करना है तो पहले आतंक विरुद्ध खड़े हो तभी वार्ता का नतीजा निकल सकता है.

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