भारत ने प्रशांत महासागर के अंतर्गत आने वाले उत्तर चीन सागर और दक्षिण चीन सागर पर चीन की प्रभुत्ता व समुद्री सीमा रेखा मानने से इंकार कर दिया. भारत ने चीन को चेतावनी देते हुए कहा है कि भारत इन देशों को अंतरराष्टï्रीय समुद्र मानता है जहां समुद्री आवागमन निर्बाध रूप करने का अधिकार संसार में सभी को है.

भारत इन समुद्रों में अपने जहाज भेजने और हवाई उड़ाने के लिये स्वतंत्र है. वह उसके लिये चीन की अनुमति नहीं लेगा. यह इलाका फ्रीडम आफ नेवीगेशन के दायरे में आता है. अगर इस समुद्री इलाके पर उसका विवाद है तो उसे उसके लिये अंतरराष्टï्रीय कानूनों के तहत हेग में विश्व न्यायालय में जाना होगा. भारत का प्रशांत सागर के देशों से व इस सागर के समुद्री मार्गों से अन्य देशों के साथ 55 प्रतिशत समुद्री व्यापार होता है और आधुनिक युग में हवाई यात्री व माल यातायात के लिये इन सागरों के ऊपर स्वतंत्र रूप से उड़ान भरने का निर्बाध अधिकार है.

अंतरराष्टï्रीय कानूनों के अनुसार हर देश के समुद्री तट में आगे समुद्रों में 12 नोटीकल मील तक उसकी समुद्री सीमा मानी जाती है. उसके आगे का समुद्र अंतरराष्टï्रीय होता है जहां संसार का कोई भी देश पानी के जहाजों या उनके ऊपर विमानों की उड़ानों के लिये पूर्ण स्वतंत्र है. चीन ने दक्षिणी चीन सागर में कुछ मानव निर्मित टापू बना लिये हैं और उनकी सीमा से समुद्री सीमा में 12 नोटीकल मील का समुद्री सीमा का दावा करता है. सबसे पहले अमेरिका ने उसके इस दावे को धता बताते हुए उसी इलाके में अपना जंगी जहाज भेजा.

चीन के जहाज उसका पीछा करते ही रहे लेकिन वह उसके विरुद्ध उस अमेरिकी लड़ाकू जहाज को रोकने का साहस नहीं जुटा सका.

भारत भी चीन के दावे के विरोध में एक कदम और आगे बढ़ गया. हाल ही में भारत की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज और प्रशांत सागर के राष्टï्र फिलीपीन्स के विदेश मंत्री अल्बर्ट एफ डे रोसारियो ने संयुक्त बैठक में यह किया कि दक्षिणी चीन सागर को भारत व फिलीपीन्स अब दोनों देश पश्चिम फिलीपीन्स सागर नाम देते हैं और इसी नाम का प्रयोग करेंगे.

कई समुद्रों में निकटवर्ती देश का नाम जुड़ा रहता है. लेकिन इसका यह अर्थ नहीं होता कि वे पूरे के पूरे उसी राष्टï्र के हैं. जैसे हिन्द महासागर (इंडियन ओशन) में हिंद (इंडियन) शब्द है. अरब सागर में अरब शब्द है. इसका यह अर्थ नहीं रहा कि पूरा हिन्द महासागर हिंदुस्तान का और अरब सागर अरब राष्टï्रों
का है.

चीन का प्रशांत सागर के सभी देशों वियतनाम, फिलीपीन्स, जापान, कोरिया से समुद्री सीमा विवाद चल रहा है और कोई भी देश उसके दावे को अंतरराष्टï्रीय सीमा में स्वीकार नहीं करता है.

भारत वियतनाम की समुद्री सीमा में ‘बाम्बे हाईÓ की तरह पेट्रो के लिए खनन कार्य कर रहा है. चीन ने इस पर ऐतराज जताया था कि वह दक्षिण चीन सागर का क्षेत्र है. लेकिन भारत ने उसे वियतनाम की सीमा रेखा ही माना और खनन कार्य को जारी रखे हुए है.

प्रशांत के अन्य देश भी अब चीन के समुद्री विस्तार को चुनौती देने खड़े हो गये हैं. पहले दो विश्व युद्ध यूरोप में जर्मनी के कारण हुए थे.
आशंका यह हो रही है कि तीसरा विश्व युद्ध प्रशांत महासागर में चीन के विस्तारवाद के कारण हो सकता है जिसका लक्ष्य चीन ही होगा.

Related Posts: