आम दिनों की तरह रही चहल कदमी, बाजारों में इक्का दुक्का दुकानें रही बंद

नवभारत न्यूज भोपाल,

अनुसूचित जाति जन जाति एक्ट को पूर्व की भांति फिर से लागू करने की मांग को लेकर मंगलवार को कथित दलित संगठनों के भारत बंद के आव्हन का राजधानी भोपाल सहित प्रदेश भर में आंशिक असर रहा.

इस दौरान आम दिनों की तरह ही बाजार खुले रहे.रेल ,बस सेवा भी कही बाधित नही हुई. बाजारों में इक्का दुकानों को छोढक़र सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठान आम दिनों की तरह की खुले रहे. साथ ही बाजारों की सभी सडक़ों में दिन भर चहल कदमी रही. प्रदेश में भी कही कोई अप्रिय घटना के समाचार नही मिले है.

भोपाल शहर में सुबह से ही भारत बंद को लेकर कथित दलित संगठनों की घोषणा आज पूरी तरह अफवाह मात्र रही. इस दौरान नए शहर के सभी बाजारों और सडक़ों पर आम दिनों की तरह रौनक नजर आई. हलांकि बंद को लेकर शहर के कुछ इलाकों में बाजारों में बंद की घोषणा के चलते कुछ व्यवसासियों ने सुबह से ही दुकाने बंद रखी. मगर दोपहर बाद नए और पुराने शहर में आम दिनों की तरह बाजार खुले रहे.

पुराने शहर के चौक बाजार,जुम्मेराती, घोड़ानिक्कास, लोहा बाजार, आजाद मार्केट, मंगलवारा, बुधवारा, इतवारा, जहांगीराबाद,ऐशबाग, स्टेशन बजरिया, बस स्टैंड, छोला रोड, सिंधी मार्केट, सिंधी कॉलोनी,नये भोपाल के न्यू मार्केट, दस नंबर मार्केट, शाहपुरा मार्केट, भेल के बरखेड़ा मार्केट, पिपलानी, आनंद नगर मेेंं सुबह बंद का आंशिक असर नजर आया. यही शहर भर में रही. मगर दोपहर बाद पुराने और नये शहर में बंद असर आंशिक रहा. इस दौरान बंद कराने के लिए टोलियां भी नजर नही आई.

पुलिस रही चौकस

भारत बंद की घोषणा के चलते मंगलवार को राजधानी पुलिस दिन भर मुस्तैद रही. इस दौरान नए और पुराने शहर के चौक चौराहों और शहर के असंवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस फोर्स के शस्त्रजवान तैनात रहे. इस दौरान शहर भर में करीब छह हजार जवान तैनात रहे. उधर प्रदेश के रायसेन, सीहोर, होशंगाबाद, खण्डवा, खरगौन, बड़वानी, इंदौर, ग्वालियर, चंबल विध्य प्रदेश, महाकौशल सहित सभी अचंलों के नगरों में बंद का असर बिल्कुल नगण्य रहा.

दलित आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के लिए कांग्रेस जिम्मेवार: गृहमंत्री प्रदेश के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने मंगलवार को कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला.उन्होंने कहा कि दो अप्रैल को दलित आंदोलन के दौरान जो हिंसा हुई थी, उसमें कांग्रेस का हाथ था.कांग्रेस ने पर्दे के पीछे से अपना मकसद साधा.

भारत बंद के दौरान हुई हिंसा में देशभर में सबसे ज्यादा आठ लोगों की मौत मध्य प्रदेश में हुई थी. ग्वालियर के मेहगांव में 22 साल के प्रदीप और 15 साल के आकाश जाटव की गोली लगने से मौत हुई थी.एफआईआर के मुताबिक, सवर्ण जाति के सोनू, मोनू और बबलू राठौर ने छत से गोली चलाई थी.

गृहमंत्री ने पत्रकारों में बताया कि बंद को लेकर पुलिस पूरी तरह सजग और सतर्क है .हालात पर मेरी और मुख्यमंत्री की नजर बनी हुई है, अभी हालात सामान्य हैं. मध्य प्रदेश शांति वाला राज्य है, जहां हिंसा का कोई स्थान नहीं है. सिंह ने दो अप्रैल के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और उसकी चपेट में आकर के सवाल पर कहा कि कुछ लोगों ने अशांति का माहौल बनाने का प्रयास किया था.ग्वालियर-चंबल के अलावा प्रदेश में कहीं भी कोई हिंसा नहीं हुई थी, इस हिंसा के पीछे कांग्रेस का हाथ था.

दलित आंदोलन पर आरोप प्रत्यारोप तेज

संभावित भारत बंद पर पुलिस और प्रशासन की चौकसी के चलते कोई अप्रीय घटना प्रदेश में नहीं घटी है.. लेकिन 2 अप्रैल को प्रदेश में हुई हिंसक घटनाओं के पीछे गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है.वहीं गृहमंत्री ने इसे कांग्रेस की एक सोची-समझी साजिश बताया है… तो वहीं कांग्रेस इसके पीछे भाजपाईयों का हाथ बता रही है.

चुनावी साल में अब आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी तेज़ हो गया है. इधर गृहमंत्री के कांग्रेस पर हमला बोलने के बाद अब कांग्रेस ने भी इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है.. कांग्रेस का कहना है कि, गृहमंत्री की गरीमा होती है..

उन्हें सोच-समझ कर बयानबाजी करनी चाहिए.. भोपाल से गिरफ्तार गजराज जाटव बीजेपी से संबंध रखता है.. वहीं ग्वालियर गिरफ्तार युवक भी बजरंद दल का है.. ऐसे में गृहमंत्री कांग्रेस पर आरोप लगा रहे है. तो वो कांग्रेसी का नाम भी उजागर करें. वहीं मुख्य प्रवक्ता केके.मिश्रा ने कहा कि, इसके लिए गृहमंत्री को माफी मंगनी चाहिए.

नागरिकों पर लाठीचार्ज की अजय सिंह ने निंदा की

नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भारत बंद के दौरान सीधी में शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों और अधिवक्ताओं पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज की निंदा की है.नेता प्रतिपक्ष सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन और पुलिस, जिस मामले को सूझबूझ से सुलझा सकती थी उसे तनावपूर्ण बनाने में मुख्य भूमिका निभाई.

उन्होंने कहा कि पुलिस ने किस दुर्भावना से कार्यवाही की है, इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि उन्होंने कोर्ट परिसर में घुसकर अधिवक्ताओं को पीटा और न्यायालय की खुलेआम अवमानना की.

उन्होंने कहा कि पुलिस का यह कृत्य निरंकुशता का प्रतीक हैं. नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा कि इस मामले की जांच होना चाहिए और इस लाठीचार्ज में जो निर्दोष लोग शिकार हुए उनके दोषियों पर कठोर कार्यवाही की जाना चाहिए.

Related Posts: