modi6लंदन, भारत और ब्रिटेन के बीच नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 3.2 अरब पाउंड से अधिक का वाणिज्यिक समझौता हुआ है इसके साथ ही दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के मकसद से शोध तथा नवोन्मेष को बढ़ावा देने के साथ ही इस क्षेत्र में त्वरित निवेश करने पर सहमत हुए हैं।

विदेश मंत्रालय ने आज जारी विज्ञप्ति में जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने जलवायु संरक्षण के लिए वित्तीय आवंटन तथा 2020 तक विकसित देशों द्वारा संयुक्त रूप से 100 अरब डॉलर जुटाने की जरूरत पर बल दिया ।

दोनों नेताओं ने जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान करने के लिए भी प्रतिबद्धता दिखायी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह शताब्दी की सबसे बड़ी वैश्विक चुनाैती है, जिससे राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय दोनों स्तर पर प्रभाव पड़ता है। दोनों देश के प्रधानमंत्रियों ने नये संयुक्त नवीकरणीय शोध केंद्रों के लिए 100 लाख पाउंड के संयुक्त पैकेज की घोषणा की , जिससे भारत और ब्रिटेन के बीच जारी स्वच्छ ऊर्जा शोध कार्यक्रम का बजट बढ़कर 600 लाख पाउंड हो जाएगा।

श्री मोदी ने भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए वृहद स्तर , कम लागत तथा लंबी अवधि की वित्तीय मदद की जरूरत को रेखांकित किया। श्री कैमरन ने घोषणा की कि ग्रीन इन्वेस्टमेंट बैंक के साथ ब्रिटेन का जलवायु निवेश उपक्रम भारत तथा अफ्रीका में नवीकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा क्षमता परियोजनाओं में कुल 2000 लाख पाउंड तक का निवेश करेगा।

दोनों ने साथ ही अपने अपने स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा के प्रोत्साहन के लिए समुचित कदम उठाने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की। श्री कैमरन ने 2050 तक ग्रीनहाऊस गैस उत्सर्जन में कम से कम 80 प्रतिशत की कमी लाने के प्रति ब्रिटेन की प्रतिबद्धता दोहरायी । कार्बन उत्सर्जन यह सीमा 2008 के जलवायु परिवर्तन अधिनियम के तहत तय की की गयी थी।

श्री मोदी ने भी 2030 तक 2005 के मुकाबले उत्सर्जन में 33 से 35 प्रतिशत तक कमी लाने की भारत के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की। दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत में दो अरब डॉलर निवेश करने की लाइटसोर्स की योजना का स्वागत किया। इस योजना के तहत भारत में 3 गीगावाट से अधिक क्षमता वाले सौर बिजली ढांचे तैयार किये जाने हैं।

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