भारत और ब्रिटेन हिन्द महासागर और प्रशांत महासागर क्षेत्र के मुक्त परिवहन को यथावत बनाये रखने के लिये आपस में मजबूत नौसेना संबंध- सहयोग बनाने का निर्णय लिया है. भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 5 दिन के स्वीडन, ब्रिटेन व जर्मनी के दौरे पर है.

ब्रिटेन में उन्होंने कामनवेल्थ (चोगम) के शिखर सम्मेलन में भाग लिया. कामनवेल्थ में 53 राष्ट्र सदस्य है. इस शिखर स्ममेलन में 46 देशों के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री भाग ले रहे हैं. ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा से द्विपक्षीय वार्ता भी हुई.

भारत और ब्रिटेन के बीच 10 समझौते पर भी हस्ताक्षर हुए. इनमें साइबर संबंध, गंगा की शुद्धि और कौशल विकास शामिल हैं. लेकिन सबसे अहम भारत और ब्रिटेन के बीच हिन्द और प्रशांत महासागरों के बीच हुआ नौसेना सहयोग का निर्णय है.

चीन जहां दक्षिण चीन के नाम पर प्रशांत में अपनी समुद्री सीमा बढ़ाना चाहता है और श्रीलंका में हबंगटोटा, पाकिस्तान में ग्वादर और उत्तरी अफ्रीका दिजबोती बंदरगाह को विकसित कर भारत की घेराबंदी कर रहा है. वहीं यह भी जानता कि भारत ने भी उसके विस्तारवाद के विरुद्ध विश्व स्तर पर भारी नाकाबंदी कर दी.

भारत, आस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका ने एक प्रशांत महासागर सहयोग संगठन बनाया है जो प्रशांत महासागर को अंतराष्ट्रीय मुक्त महासागर ही बनाये रखेगा. भारत का फ्रांस के साथ भी नौसैनिक सहयोग करार है. पिछले महीने फ्रांस के राष्ट्रपति मैन्युअल मैक्रा भारत आये थे. उस समय यहां नौसैनिक सहयोग पर वार्ता हुई थी. अब श्री मोदी ने ब्रिटेन में भी प्रशांत व हिन्द महासागर पर द्विपक्षीय करार किया है.

श्री मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा की वार्ता के बाद संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है कि भारत और ब्रिटेन की नौसेनाओं के बीच हिन्द-प्रशांत महासागरों के क्षेत्र में नये सहयोग की शुरुआत होने जा रही है. हिन्द प्रशांत महासागर क्षेत्र सभी के लिये समान तौर पर खुला होना चाहिए. यह भारत-ब्रिटेन और पूरी दुनिया के हित में है.

दोनों नेताओं ने सभी राष्ट्रों से कानून सम्मता नौ वहन व्यवस्था का पालन करने का आव्हान किया है. प्रशांत महासागर से दुनिया का 70 प्रतिशत समुद्री व्यापार होता है और दोनों देशों ने यहां मालवाहक जहाजों का मुक्त परिवहन बने रहने और उसे बनाये रखने का इरादा व्यक्त किया है.

चीन जिस तरह से दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में अपनी नौसैनिक शक्तियां को बढ़ा रहा है. उससे पूरी दुनिया में चिंता है. इस क्षेत्र के देश वियतनाम, फिलीपिन्स, मलेशिया आदि बड़े देशों में खासकर भारत और अमेरिका से यह अपेक्षा करते है कि वे प्रशांत-हिन्द महासागर को हमेशा की तरह मुक्त व्यापारिक मार्ग के रूप में कायम रखेंगे.

दोनों देशों के बीच गंगा शुद्धिकरण योजना पर समझौता हुआ है. इससे ब्रिटेन की संस्था नेचुरल एनवायरमेंट रिसर्च काउंसिल भारत की संस्था गंगा एक्शन प्लान नेशनल मिशन से सहयोग करेगा. इस बारे में एम.ओ.यू. के हस्ताक्षर हो गये हैं.

प्रधानमंत्री श्री मोदी अपने विदेशी प्रवासों में उन देशों में भारतीयों से मिलने की परंपरा को जारी रखा है. वे स्वीडन व ब्रिटेन में भारतीय समुदाय के सम्मेलनो को संबोधित किया.