modiनयी दिल्ली,  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूस को भारत का सबसे मूल्यवान मित्र एवं सामरिक साझेदार बताते हुए आज विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, आर्थिक एवं सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग और प्रगाढ़ होगा।

श्री मोदी ने रूस की दो दिन की यात्रा पर रवाना होने के पहले अपने वक्तव्य में कहा, “मेरी यात्रा से भारत और रूस के बीच आर्थिक, ऊर्जा एवं सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग और गहरा होगा।” उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बनने के बाद यह उनकी रूस की पहली द्विपक्षीय यात्रा है और वह अपनी इस यात्रा के परिणामों के प्रति बहुत आशावादी हैं।

रुस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन के नियंत्रण पर 16वें भारत रुस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने श्री मोदी आज दोपहर बाद मास्को रवाना हो गये। वह स्थानीय समयानुसार पांच बजे मास्को पहुँचेंगे। रूसी राष्ट्रपति ने श्री मोदी के सम्मान में आज रात्रिभोज का आयोजन किया है जहाँ रात आठ बजे दोनों नेताओं की मुलाकात होगी।

श्री मोदी मास्को में सबसे पहले दस बजे आपदा प्रबंधन क्षेत्र में सहयोग के मकसद से “ एमरकाम“ का दौरा करेंगे। अपराह्न दो बज कर 40 मिनट पर वह अज्ञात सैनिकों के स्मारक पर श्रद्धांजलि देने जाएँगे। वहाँ से लौटकर तीन बजे क्रेमलिन में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच शिखर बैठक शुरू होगी। दोनों नेता सवा पांच बजे भारत-रुस सीईओ फोरम को संबोधित करेंगे। शाम सवा छह बजे समझौतों पर हस्ताक्षर किये जाएँगे और साढ़े छह बजे प्रेस वक्तव्य हाेंगे।

शाम को करीब साढ़े सात बजे एक्सपो सेंटर में प्रधानमंत्री फ्रेंड्स ऑफ इंडिया कार्यक्रम को संबोधित करेंगे जिसमें तीन हजार से अधिक लोगों के भाग लेने की संभावना है। तत्पश्चात वह स्वदेश रवाना होंगे ।

विदेश सचिव एस जयशंकर के अनुसार शिखर बैठक में दोनों देशों के बीच कई दि्वपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किये जाएंगे । उन्होंने बताया कि सैन्य आयुधों की आपूर्ति के अलावा परमाणु ऊर्जा सहयोग खासकर कुडनकुलम परियोजना के आगे के चरण के बारे में करार होने की उम्मीद है।

श्री मोदी ने कल रूसी समाचार एजेंसी इतर तास के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि भारत, रूस की मदद से उच्चतम सुरक्षा मानकों के साथ कम से कम बारह परमाणु संयंत्रों का निर्माण करेगा। उन्होंने कहा “मैं कुड़नकुलम परमाणु संयंत्र के शुरु होने पर खुश हूं। हम परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल में सहयोग लेने में विश्वास रखते हैं। ऊर्जा सुरक्षा भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है और रूस इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भागीदार है।

परमाणु ऊर्जा हमारी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण घटक है। वर्तमान समय में रूस हमारा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय भागीदार है। परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में रूस के साथ हमारा सहयोग हमारी सामरिक भागीदारी का एक आधार है।”

प्रधानमंत्री ने भारत रूस के बीच सहयोग की भावी व्यापक रूपरेखा स्पष्ट करते हुए कहा कि हम अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा खनन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। भारत और रूस न केवल दोनों देशों, बल्कि विश्व के लाभ के लिए अपने व्यापार संबंधों को और आगे बढ़ा सकते हैं।

दोनों देश कारोबार की वस्तुओं पर सीमा शुल्क , हीरों के व्यापार, भारतीय कृषि उत्पादों के रुस में आयात के साथ ही यूरेशियाई आर्थिक जोन और भारत के बीच एफटीए पर बात करेंगे । भारत इस करार पर अपना अध्ययन पूरा कर चुका है । इसके अलावा कोयला, पेट्रोलियम उच्च प्रौद्योगिकी उपकरण के क्षेत्र में सहयोग के साथ पर्यटन एवं जनता के बीच संपर्क बढ़ाने के बारे में चर्चा होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा “रूस के साथ हमारे संबंध अद्वितीय हैं। रक्षा, परमाणु ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी समेत अन्य क्षेत्रों क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच मजबूत भागीदारी है। रूस के हाइड्रोकार्बन संसाधन दुनिया के शीर्ष स्रोतों में से एक है और भारत इसका दुनिया के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। हमनें इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण निवेश किया है। ”

श्री मोदी ने कहा कि वह राष्ट्रपति श्री पुतिन के साथ व्यापक विचार-विमर्श करेंगे और रूसी व्यवसायियों को भारत में निवेश करने के लिए आमंत्रित करेंगे। उन्होंने बताया, “मैं ‘भारत के मित्र यानी फ्रेंड ऑफ इंडिया’ कार्यक्रम में भी शिरकत करूंगा। मुझे पूरा विश्वास है कि दोनों देशों के लोगों के बीच के पहले से मजबूत रिश्तों को मेरी यह यात्रा काफी हद तक आगे ले जाएगी।”

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