भारत और रूस के गहरे संबंधों में एक और नयी उपलब्धि हुई जो भारत के रक्षा मंत्री श्री मनोहर पर्रीकर और रूसी रक्षा मंत्री ने भारत के लिये रूसी मिसालइल सिस्टम एस-400 के लिये करार पर हस्ताक्षर किया. यह 70,000 करोड़ रुपयों का करार है. इस समय यह मिसाइल दुनिया में सबसे आधुनिक सिस्टम है. यह दुश्मन की मिसाइल को 400 किलोमीटर की दूरी पर ही मारकर गिरा सकती है. इसीलिए इसका नामकरण एस-400 है. चीन ने भी रूस से यही सिस्टम लगभग 6 महीने पर प्राप्त किया हुआ है.

भारत रूस से एक परमाणु पनडुब्बी पहले ले चुका है और दूसरी ऐसी ही पनडुब्बी के लिये आगामी दिसंबर में करार होने जा रहा है. जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी रूस में भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिये रहेंगे.

मारक हवाई जहाज (फाइटर प्लेन) के क्षेत्र में भारत में रूसी फाइटर प्लेन ‘मिगÓ का प्रयोग हो रहा है. अब रूस के ही अति आधुनिक फाइटर प्लेन सुखोई भारतीय वायुसेना के लिये लिये जा रहे हैं. भारत की ‘मेक इन इंडियाÓ के अनुरूप रूस इन सुखोई विमानों का निर्माण…. भारत में ही करेगा. इसके अलावा रूस ‘टी-90Ó…. टैंकों का निर्माण भी भारत में करेगा. रूस के अलावा भारत फ्रांस से भी कुछ से रसैल फाइटर प्लेन भी ले रहा है. पहले इनके लिये फ्रांस से विमानों के लिये समझौता हुआ था. लेकिन अब वे कुछ कम संख्या में लिये जा रहे हैं. जर्मनी भी भारत को अपना फाइटर प्लेन बेचने के लिए आतुर था, लेकिन वह सौदा ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया. अब भारत की रक्षा के क्षेत्र में यह नीति है कि जो भी सैनिक उपकरण भारत खरीदता चला आ रहा है उन्हें भारत में भी बनाया जाए. रूस इस क्षेत्र में भी भारत की नीति के अनुरूप फाइटर प्लेन और टैंक बनाने का काम भारत में ही करेगा.

रूस से एस-400 का जो मिसाइल सिस्टम लिया जा रहा है वह 20 किलोमीटर की परिधि में दुश्मन के हमले से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है.

आजादी के बाद से भारत अपने रक्षा उपकरण व लड़ाकू विमान ब्रिटेन और ज्यादातर अमेरिका से ही खरीदता रहा. भारत की वायुसेना में अमेरिकी एफ-16 फाइटर प्लेन हुआ करते हैं. लेकिन राष्टï्रपति निक्सन और उनके सेक्रेटरी माकस्टेट श्री जानकारनर डलेस और हेनरी किसिन्जर के कार्यकाल में वे पाकिस्तान के पक्षधर हो गये और रक्षा सामानों की आपूर्ति मेें भारत के प्रति दुर्भावना हो गई उसे राजनैतिक दबाव और न… देने का रुख रहा. इसी वातावरण में भारत से रक्षा संबंध जो और दिन-ब-दिन गहराते चले जा रहे हैं.

भारत अभी तक मिलीट्री साजो-सामान का दुनिया में सबसे बड़ा खरीददार माना जाता है. अब ‘मेक इन इंडियाÓ में विदेशी राष्टï्र भारत में आकर ही उनका निर्माण करेंगे. भारत की यह नीति राष्टï्र के अत्याधिक हित में है. रक्षा उपकरणों को अभी तक खरीदा जाता था और अब वही राष्टï्र उसे भारत में ही बनायेंगे.

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