rupee1नई दिल्ली, 26 जुलाई. भारत में वृद्धि बढ़ाने के मकसद से विकास मद में खर्च बढ़ाने का असर देश में प्रति व्यक्ति कर्ज में भारी वृद्धि के रूप में सामने आया है। कर्ज के बोझ में बाहरी और आंतरिक कर्ज एवं अन्य प्रकार की देनदारियां हैं। प्रति व्यक्ति कर्ज में इजाफे का मुख्य कारण बेहतर वृद्धि दर हासिल करने के लिए विकास मद में खर्च को बढ़ाना है। वर्ल्ड बैंक की अंतरराष्ट्रीय कर्ज सांख्यिकी 2015 के अनुसार, 20 विकासशील देशों की सूची में भारत सबसे ज्यादा कर्ज में डूबने वाले देशों के चौथे पायदान पर है।

सरकारी खाते में साल 2012-13, 2013-14 और 2014-15 के लिए घरेलू कर्ज सेवा भुगतान क्रमश: 4.04 लाख करोड़, 4.85 लाख करोड़ रुपये और 5.56 लाख करोड़ रुपये है। बाहरी कर्ज सेवा भुगतान 2012-13, 2013-14 और 2014-15 में क्रमश: करबी 238,483,620.00 रुपये, 234,637,110.00 रुपये और 249,382,065.00 रुपये है। 31 मार्च 2015 तक कुल देय देनदारी 68.95 लाख करोड़ रुपये है। सरकार ने 2016-17 तक हर साल 0.5-0.6 प्रतिशत कम करके वित्तीय घाटे को 3 प्रतिशत तक लाने के लिए रोड मैप बनाने की घोषणा की है।

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