naiduनयी दिल्ली,  शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने भारत को दुनिया का सबसे सहिष्णु देश बताते हुये कहा है कि यहाँ किसी पर हमला करने की परंपरा नहीं रही है। श्री नायडू ने कल रात यहाँ दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने कहा, “भारत दुनिया का सबसे सहिष्णु देश है। यहाँ किसी पर हमला करने का इतिहास नहीं रहा है। हम किसी को दु:ख नहीं पहुँचाते। हम तो जीव-जंतुओं, कीटों और पेड़ पौधों से भी प्यार करते हैं।”

पिछले दिनों दिल्ली में अफ्रीकी छात्रों पर हुये हमले तथा गत वर्ष उत्तर प्रदेश में हुये सांप्रदायिक दंगों के बाद असहिष्णुता पर अचानक उठी बहस के संदर्भ में यह बयान महत्वपूर्ण है। असहिष्णुता के मसले पर फिल्म जगत से लेकर साहित्य जगत तक की कई जानीमानी हस्तियों ने अपने पुरस्कार भी लौटाये थे। श्री नायडू ने एक वाकये के बारे में बताते हुये इशारों-इशारों में कहा कि संभवत: उन लोगों को यह पता चल गया था कि वे उन पुरस्कारों के लायक नहीं हैं, इसलिए उन्होंने पुरस्कार लौटा दिये।उन्होंने कहा, ‘‘ लोग सोच रहे हैं कि मोदी आ गया, सब कुछ हो जायेगा। ऐसा नहीं है। सिर्फ नरेंद्र मोदी या मंत्रिमंडल से विकास नहीं होगा।

सबके प्रयास से विकास होगा।” उन्होंने आर्थिक विकास में सहयोग के लिए निजी क्षेत्र का आह्वान करते हुये कहा कि निजी क्षेत्र की प्रतिभाओं को अपनी भागीदारी दिखानी होगी। सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) को समय की जरूरत बताते हुये श्री नायडू ने कहा कि सरकार का कारोबार में अब कोई काम नहीं रह गया है। यह काम निजी क्षेत्र का है।

आजादी के बाद पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के समय निजी क्षेत्र लगभग अस्तित्व में था ही नहीं। इसलिए, उस समय इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की जिम्मेदारी सरकार को उठानी पड़ी। लेकिन, आज निजी क्षेत्र इस काम में पूरी तरह सक्षम है। पुरानी सरकारों पर निशाना साधते हुये उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभाओं की कभी कमी नहीं रही, लेकिन उन्हें अवसर नहीं दिया गया। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की अटल जी की सरकार तथा नरेंद्र मोदी सरकार ने उन्हें अवसर देने की शुरुआत की है।

Related Posts: